क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट -20

पार्ट - 20

by Sonal Johari

अभी ऑफिस पहुंचा भी नहीं था कि राव सर ऑफिस से, निकलते दिखे ..अंकित को देखा तो उसी की ओर आ गए “अंकित …बेफिक्र हो जाओ अब तुम्हे नवीन कुछ नहीं कहेगा

***

“हाँ ..मैंने उसे समझाया …और वो मान भी गया…कभी मिले भी, तो इस बारे में उससे बात मत करना बस्स “

“बहुत बहुत शुक्रिया सर ,आप का ये एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूँगा” उसने बड़े दिल से ये बात बोली तो राव सर ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा

“इसमे एहसान की कोई बात नहीं ..बल्कि तुमने रुचिका की जान बचाकर हम सब पर एहसान किया है ”

“नहीं सर..ऐसा भी कुछ नहीं किया मैंने ” अंकित बोला तो राव सर मुस्कुरा दिए ..

” ठीक है भई… अच्छा मैं चलता हूँ..कल मिलता हूँ तुमसे ..”

अंकित साइड में हट गया और राव सर गाड़ी में बैठ निकल गए

अंकित अपने केविन में आया और सीट पर आंखे बंद कर बैठ गया …अनामिका के कहे हुए शब्द उसके कानों में मानो बज रहे हों ..बहुत मखमली एहसास को जी रहा था ..चेहरे पर आई मुस्कान और देर भी बनी रहती …अगर एक्स्टेंशन पर फ़ोन नहीं आया होता ..उसने रिसीवर उठाया ..उधर से राहुल बोल रहा था..

“अंकित ..जरा आओ ना बस ….थोड़ी देर के लिए “

“हम्म ..”बोलकर उसने रिसीवर रख दिया

खिले चेहरे पर विषाद के भाव आ गए अंकित के….वो खुद में बुदबुदाया ‘कोई फर्क नहीं पड़ता अब मुझे ..तुमसे राहुल ..कोई नहीं …मैं पहले ही जीत चुका हूँ…तुम्हारा एकतरफा प्यार ..एकतरफा ही रहेगा…बल्कि मुझे तो तुमसे हमदर्दी होनी चाहिए ..हम्म ” वो मुस्कुराया और राहुल के केविन की तरफ चला गया …राहुल ..दो बड़े चार्ट मेज़ पर फैलाये ..मुंह में पेन का कैप फॅसा ..एक हाथ मे पेन और दूसरे हाथ में बड़ा सा स्केल लिए खड़ा था…जैसे ही अंकित अंदर पहुंचा उसने मुँह में से पेन का कैप, फूंक मार बाहर निकाला और बोला “अंकित …आओ बैठो …बहुत मेहनत के बाद मैंने ये दो फाइनल ..डिजाइन बनाई हैं .(दो मॉडल की तरफ इशारा कर के ) ये बताओ कि दोंनो डिजाइनों में से कौन सी डिजाइन ज्यादा अच्छी है ..बस्स फर्क ये है कि ..इस डिजाइन में (एक मॉडल की ओर इशारा करते हुए ) लोगों के बैठने के लिए जगह कम है बल्कि इसमें (दूसरी डिजाइन की ओर इशारा कर के) ज्यादा जगह है

अंकित मन ही मन ” ये पूछ ना … कि मुझे तेरी शक्ल पसंद है या नहीं …तब मैं बताता कि दुनिया की हर चीज़ पसंद है मुझे .. बस तेरी शक्ल नहीं ….काश… कह पाता”

राहुल ने उसे चुप देखा तो बोला “क्या सोच रहे हो..बेझिझक बताओ ना कौन सी बेहतर है”

अंकित ने यूँ ही ..अपने हाथ पे बंधी घड़ी को खोला और और फिर से बांध लिया ये जताने को जैसे बहुत गहनता से डिजाइन के बारे में सोच रहा है ..लेकिन ठीक से देखा भी नहीं और एक डिजाइन पर उंगली रख दी, बोला “मुझे ये ज्यादा बेहतर लग रही है “

राहुल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी ..”वाह ..मुझे भी ये डिजाइन ज्यादा पसंद है .लोग ज्यादा बैठने वाली जगह को पसंद करेंगे …फाइनल डिसीजन तो अंकल ही लेंगे …बहुत बढ़िया यार”

“तो चलूँ.. मीटिंग की तैयारी करनी है ” अंकित ने उठते हुए कहा

“हाँ ..ठीक है …अच्छा सुनो अंकित …जब भी तुम्हे देखता हूँ..लगता हैं हम पहले भी मिल चुके हैं”

अंकित ने सोचा अगर ना बताया तो ये सोचता रहेगा ..बता देने से शायद इसका भृम भी खत्म हो जाये और ये सोचे भी ना कि इसे, इसके घर मे जाकर पीट आया हूँ ….सो उसने ..बोला “जी…काफी दिनों पहले .. मार्केट में ,हम टकरा गए थे एक दूसरे से .आपका वॉलेट गिर गया था..और…” अंकित की बात बीच मे काटते हुए वो बोला

“और उस वॉलेट को तुमने उठा कर मुझे दिया था ..याद आया ” वो खुश होते हुए बोला

“जी” अंकित ने बोला और ….जाने लगा

“वॉलेट के गिरने से कोई दिक्कत नहीं ..लेकिन उसमें अनामिका की फ़ोटो जो थी.. आह..”उसने मुस्कुराते हुए कहा,और फ्रेम लगी अनामिका की फ़ोटो हाथ मे लेकर उसे अपने सीने से लगा लिया

ये शब्द सुन कर और उसे अनामिका की फ़ोटो उसे, ऐसे सीने से लगाये देखकर… अंकित के तन बदन में आग लग गयी वो तेज़ी से पीछे पलटा ..उसके मन ने रोका ‘नहीं अंकित …इग्नोर कर ..जरूरत नहीं है बेकार में “”बहुत हुआ …जवाब दे गया है मेरा धैर्य.. “अंकित बुदबुदाया

“क्या रिश्ता है अनामिका से तुम्हारा”? अंकित ने पूछा

“तुम ऐसे ..कैसे पूछ रहे हो ?” उसने तनिक आवेग में आते हुए पूछा

“क्यों ना पूछूँ ..वो जिंदगी है मेरी ..प्यार करता हूँ उससे मैं”

अंकित ने भी आवेग में जवाब दिया

राहुल :-“क्या …क्या बकवास करते हो “?

अंकित:-“बकवास तो तुम कर रहे हो ..बहुत हुआ ..बहुत किया बर्दाश्त मैंने ..अब नहीं” गुस्से में अंकित की आंखे लाल हो आयी

राहुल :-“बर्दाश्त तो मैं कर रहा हूँ …तुझे.. “बोलते हुए वो कुछ कदम चलकर अंकित के पास तक आया ..और अपने हाथ को उसने पंजे की तरह इस्तेमाल करते हुए अंकित का जबड़ा पकड़ लिया ..और पीछे की ओर धकेलता हुआ दीवार तक ले गया ..दीवार से सटाकर अपना चेहरा बिल्कुल अंकित के चेहरे पास लाते हुए

बोला ” अगर कुछ वक्त पहले भी तूने ये बोला होता ना …तो तुझे यहीं मसल देता …और मसल तो अब भी सकता हूँ लेकिन अंकल को खास लगाव है तुझसे …और अंकल से मुझे … …बात रिश्ते की पूछी ही है.. तो सुन …तुझ जैसे जाने कितनों को छोड़ कर ,उसने (फिर अपना बाएं हाथ की उंगली में पहनी अंगूठी दिखाते हुए )ये अंगूठी ..सबके सामने पहनाई थी मुझे ..समझा…”

और एक झटके के साथ उसे छोड़ते हुए वो बापस अपनी सीट पर बैठ गया… टेबिल के ड्रॉर में से बीयर की बोतल निकाली और एक घूंट पीने के बाद अंकित की ओर देखकर बोला

“बेफिक्र रह ..बच्चा नहीं हूँ मैं …जो ये बात अंकल तक पहुँचाऊँ ..पहली गलती है तेरी, इसलिए छोड़ता हूँ ..आगे से मुझे अपना ये एटिट्यूड मत दिखाना …समझा”

अंकित जो उससे दो दो हाथ करने के मूड में था ..जैसे ही राहुल की उंगली में पड़ी अंगूठी देखी …उसके बाद.राहुल की कही कोई भी बात उसके कानों में नहीं गयी .अंगूठी देखने के बाद ….सदमे में अंकित बिल्कुल जड़ हो गया …कानों में ‘बीप्प ‘ ….की आवाज और आंखों में अगूंठी की तस्वीर छप गयी हो जैसे…तेज़ कदमों से चलता हुआ अपने केविन में गया और पूरी ताकत से अपने दोनों हाथ टेबिल पर दे मारे

“साला …नौटंकी क्या है ये ……सिंदूर देकर मुझसे कहा मांग भर दो …और ये कमीना कहता है ‘कि अनामिका ने उसे अगूंठी पहनाई है’…फिर अपनी दोनों हथेलियां देखते हुए

‘अनामिका …अगर सच मे तुमने इसे अंगूठी पहनाई है …तो आज …..आज गयीं तुम मेरे हाथो से …मार दूँगा मैं आज तुम्हें ‘…

दाँत भीचता ..लाल आंखों के साथ वो केविन से बाहर निकला ‘ धड़ाक’ की आवाज के साथ केविन का गेट मारा …और गुस्से में लगभग दौड़ता सा बाहर निकल गया

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