पार्ट - 23
by Sonal Johari
Details
Summery
प्रोपर्टी के लिये लोग सालों साल घपला करते हैं …ये तो बस्स महीनों की बात है …वो दो दिन पहले ही मिला है उससे …पागल तो है नहीं अंकित …जो उसकी बात को झुठला दिया जाए …रही बात फाइल की..? बन्द फाइल को खोलने में देर कितनी लगती है..?
- Language: Hindi
सुबह जल्दी से तैयार होकर सूरज ,अंकित को सोता छोड़ घर से निकल गया…अंकित भी जब उठा तो बिना वक़्त गवाए सीधे पुलिस स्टेशन पहुँच गया …जब पहुंचा तो सामने इंस्पेक्टर नवीन ही बैठा मिला …अंकित को देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी .
बोला “आइये पी.ए.साहब ..कैसे आना हुआ “?
अंकित :–(मन ही मन सोचते हुए ..इसे भी यहीं मिलना था अब किसी और इंस्पेक्टर के बारे में पूँछू तो चिढ़ जाएगा ..इसे ही बताना पड़ेगा )”नवीन सर ..मुझे आपकी मदद चाहिए ..”
नवीन :–“मदद ….सो भी मेरी …कहो ” हँसते हुए बोला
अंकित :-(अनामिका का फोटो दिखाते हुए) “ये दो दिन पहले तक अपने घर मे थी ..लेकिन अब नहीं है…मुझे डर है इनके साथ कोई हादसा ना हो जाये ..कृपया जल्दी ढूंढने में मेरी मदद करेंगे ?.”
नवीन :-“कहीं देखी हुई सी लग रही है कौन है ये “?
अंकित :-“मेरी प्रेमिका है ..प्लीज़ सर मदद कीजिये ना..
नवीन :-“झगड़ा किया होगा आपस मे …चली गयी होगी और हमारे पास पच्चीस काम और भी हैं …अब हम घर के झगड़े भी सुलझाएं ? जाओ यहाँ से “
अंकित :-“एक मिनट के लिए भूल जाइए ..कि आप इंस्पेक्टर हैं..आपने भी किसी से प्यार किया होगा…हमारा कोई झगड़ा नहीं हुआ है …इसकी जान खतरे में है …प्लीज़ मेरी मदद कीजिये “
नवीन :-(एकदम गंभीर बनते हुए )”हम्म …तेरी बात पसंद आई मुझे …मदद करूँगा तेरी …अच्छा ला फ़ोटो दिखा …”
अंकित ने फ़ोटो दिया तो गौर से देखने के बाद उसके माथे पर बल पड़ गए …फिर अपना निचला होठ चबाते हुए “कहीं देखा है मैंने इसे …लेकिन याद नहीं आ रहा …चलो छोड़ो …ये बताओ किसी पर शक है तुम्हे “
अंकित :-“हाँ …राहुल पर “?
नवीन :–“कौन राहुल “?
अंकित :– (गुस्से में ) “राव सर का भतीजा “
नवीन :–(चुटकी बजाते हुए …जैसे याद आ गया हो ) अररे हाँ …याद आया …ये तो राहुल की होने वाली पत्नी का फोटो है …और इसकी तो .मौत …उन दिनों यहां नही था मै …बाद में अखवारों में फ़ोटो देखी थी इसकी….एक मिनट… तुम तो कह रहे थे ये तुम्हारी प्रेमिका है …क्या सुबह से कोई और नहीं मिला तुम्हें “
अंकित :-“(उत्तेजित होते हुए )झूठ है ये सब …बकवास है.उन लोगों ने ही गायब कराया है इसे…अच्छी भली है ..और ..जीवित है
नवीन :–“क्या ? जीवित है “
अंकित :-“परसों मिला हूँ मैं इससे “
नवीन :–“कहाँ पर मिले हो”
अंकित :-“उसके घर पर “
नवीन :- ” घर …वो ..वो मोड़ वाला बंगला “?
अंकित :- “हाँ “
नवीन :-“क्या बकवास है ये ?…उस तरफ कोई जाता तक नहीं ..”
अंकित :-“मैं सच कह रहा हूँ”
नवीन :-“मुझे यकीन नहीं …लेकिन तुम्हारी बात और इस विश्वास की खातिर तफ्तीश करता हूँ…मदद का वादा जो किया है …एक दिन की मोहलत दो …राव सर हों या उनका भतीजा ..गुनाहगार हैं तो बचेंगे नहीं …ये एक दोस्त का वादा है ,…राव …हम्म ..शक तो उस पर था मुझे (बुदबुदाते हुए )कोई भला एम्प्लोयी के लिए रिश्वत देगा …लेकिन जब उसने मुझे नोटों का बैग दिया …तो लगा मेरी गलतफहमी होगी …लेकिन अब …..हम्म ..
अंकित :- “क्या… क्या दिया आपको “?
नवीन :–“कुछ नहीं …कल मिलो मुझसे इसी वक्त “
अंकित :-“बहुत धन्यवाद आपका ..कल मिलता हूँ”
***
अंकित जब बापस आया तो …सूरज को बैठे हुए पाया
.सूरज :-” कहाँ गए थे तुम “
अंकित :-“पुलिस स्टेशन “..
सूरज :- “कुछ हुआ “?
अंकित :- “नवीन मिला..बहुत प्यार से बात की उसने मुझसे”
सूरज :- “तुमने तो बताया था …सुरुचि के केस के वक़्त बहुत चिड़ा हुआ था वो तुमसे “
अंकित :-“हम्म …आज मैंने उसे उसके प्रेम का वास्ता दिया …तो दोस्त बनाते हुए उसने मदद का वादा किया है कल तक का समय लिया है ….तुम कहाँ गए थे “?
सूरज :-“भाभी के कॉलेज गया था “
अंकित :- “कुछ पता लगा “?
सूरज :–” (दुखी होते हुए “)हम्म”
अंकित :–” क्या …तो बताओ ना “
सूरज :–“भाभी बहुत होशियार थी “
अंकित : -” थीं नहीं …हैं “
सूरज :–“पहली और दूसरी दोनो सालों में उन्होंने टॉप किया था “
अंकित :–“हम्म “
सूरज :–“कॉलेज के बहुत बच्चों की फीस वो भर दिया करती थी ..मदद करती रहीं थी सबकी “
अंकित :–(खीजते हुए )”तुम पता करने क्या गए थे? उसके बारे में या उसके ऐकडेमिक बैकग्राउंड के बारे में”?
सूरज :-” पता तो लगा है लेकिन पहले वादा करो कि तुम धैर्य से काम लोगे ?”
अंकित :-” हाँ …हाँ बोलो भी …”
सूरज :-” लगभग हर प्रोफेसर से मिला होऊंगा …सब उनकी तारीफ करते हुए यही कहते हैं कि वो लगभ पांच महीने पहले इस दुनिया से चली गयी हैं “
अंकित :- “(गुस्से में ) सू….र…ज “
अंकित :- “हाँ “
नवीन :-“क्या बकवास है ये ?…उस तरफ कोई जाता तक नहीं ..”
अंकित :-“मैं सच कह रहा हूँ”
नवीन :-“मुझे यकीन नहीं …लेकिन तुम्हारी बात और इस विश्वास की खातिर तफ्तीश करता हूँ…मदद का वादा जो किया है …एक दिन की मोहलत दो …राव सर हों या उनका भतीजा ..गुनाहगार हैं तो बचेंगे नहीं …ये एक दोस्त का वादा है ,…राव …हम्म ..शक तो उस पर था मुझे (बुदबुदाते हुए )कोई भला एम्प्लोयी के लिए रिश्वत देगा …लेकिन जब उसने मुझे नोटों का बैग दिया …तो लगा मेरी गलतफहमी होगी …लेकिन अब …..हम्म ..
अंकित :- “क्या… क्या दिया आपको “?
नवीन :–“कुछ नहीं …कल मिलो मुझसे इसी वक्त “
अंकित :-“बहुत धन्यवाद आपका ..कल मिलता हूँ”
***
अंकित जब बापस आया तो …सूरज को बैठे हुए पाया
.सूरज :-” कहाँ गए थे तुम “
अंकित :-“पुलिस स्टेशन “..
सूरज :- “कुछ हुआ “?
अंकित :- “नवीन मिला..बहुत प्यार से बात की उसने मुझसे”
सूरज :- “तुमने तो बताया था …सुरुचि के केस के वक़्त बहुत चिड़ा हुआ था वो तुमसे “
अंकित :-“हम्म …आज मैंने उसे उसके प्रेम का वास्ता दिया …तो दोस्त बनाते हुए उसने मदद का वादा किया है कल तक का समय लिया है ….तुम कहाँ गए थे “?
सूरज :-“भाभी के कॉलेज गया था “
अंकित :- “कुछ पता लगा “?
सूरज :–” (दुखी होते हुए “)हम्म”
अंकित :–” क्या …तो बताओ ना “
सूरज :–“भाभी बहुत होशियार थी “
अंकित : -” थीं नहीं …हैं “
सूरज :–“पहली और दूसरी दोनो सालों में उन्होंने टॉप किया था “
अंकित :–“हम्म “
सूरज :–“कॉलेज के बहुत बच्चों की फीस वो भर दिया करती थी ..मदद करती रहीं थी सबकी “
अंकित :–(खीजते हुए )”तुम पता करने क्या गए थे? उसके बारे में या उसके ऐकडेमिक बैकग्राउंड के बारे में”?
सूरज :-” पता तो लगा है लेकिन पहले वादा करो कि तुम धैर्य से काम लोगे ?”
अंकित :-” हाँ …हाँ बोलो भी …”
सूरज :-” लगभग हर प्रोफेसर से मिला होऊंगा …सब उनकी तारीफ करते हुए यही कहते हैं कि वो लगभ पांच महीने पहले इस दुनिया से चली गयी हैं “
अंकित :- “(गुस्से में ) सू….र…ज “
सूरज :- “मैं नहीं वो सब कहते हैं…यहां तक कि हर स्टूडेंट …वो सबकी मदद करती रही थी इसलिए उन्हे सब जानते हैं “
अंकित :-“राब ने रिश्वत खिलाई होगी “
सूरज :-” रिश्वत एक को खिलाई जा सकती है…दो को …चलो सबको खिला दी …लेकिन उनको तो नहीं जो कॉलेज पासआउट हैं …”
अंकित :- ” क्या …?
सूरज :–” हाँ …इतनी बड़ी बात ..तुम्हे क्या लगता है कमी छोडूंगा मैं तफ्तीश करने में ? …धीरज जो इसी कॉलेज से पासआउट है ..उससे मिल कर आ रहा हूँ…वो भी यही कहता है ..और कल जब मैं तुम्हारे साथ वहां गया था जहाँ तुमने कहा भाभी रहती है …तो माफ करना …वो जगह सामान्य नहीं थी …डर लग रहा था मुझे वहाँ ..वो डरावनी जगह थी ..ना जाने तुम्हें सब क्यों नहीं दिखा ..मेरी तो अंतड़ियां काँप गयी ..मुझे लगता है …मुझे लगता है कि सब ठीक कह रहे हैं “
अंकित :-“सू…र …ज ….” अंकित ने सूरज को मारने के लिए अपना हाथ उछाला और ना जाने क्या सोच रुक गया
सूरज :–“रुक क्यों गए मार लो मुझे …जो तुम्हारा हाल है …जितना चाहो मुझे पीट लो ..उफ्फ तक करुँ तो कहना …तुम्हारी हालत समझता हूँ …लेकिन क्या करूँ …कुछ समंझ नहीं आ रहा …एक काम करो अंकित, तुम डॉ लाल से मिल लो वो बड़े अच्छे मनोचिकित्सक है…मुझे यकीन है कुछ ऐसा है …जो हमारी समझ से बाहर है “
अंकित ने सुरज को घूरते हुए देखा और बदहवास सा घर से निकल गया…..
सूरज :- “कहाँ जा रहे हो अंकित …अ …..कि….त.. रुको मैं .कहता हूँ रुको …………लेकिन अंकित नहीं रुका …..
नवीन अनामिका केस की फाइल चेक करने के बाद ..राव सर से मिलने पहुंच गया …राव सर, ऑफिस से निकलने की तैयारी में थे ,कुछ जरूरी फाइल और पेपर बैग में रख रहे थे ..नवीन को देखा तो ठिठक गए और बोले
“नवीन …तुम …अचानक…कैसे आना हुआ “?
नवीन :-“क्यों मेरा आना आपको अच्छा नहीं लगा “?
राव सर:-(फीकी सी मुस्कान के साथ ) पुलिस वालों का आना किसे अच्छा लगता है “?
नवीन :-“हा.. हा.. हा …अह… अह …बात तो ठीक है (कुर्सी पर बैठते हुए )यूँ ही आज चौक वाली रोड से होकर गुजर रहा था…एक केस के सिलसिले में …तो नजर उस बंगले पर चली गयी ..आप की याद आ गयी सोचा मिलता चलूँ ..एक कप चाय भी हो जाएगी ..”
राव सर:-“हम्म ..(संपत की ओर देखकर ) जरा कहो किसी से केंटीन में,.. कि दो कप चाय भेजे और साथ में कुछ खाने को …संपत के हटते ही नवीन खोजी आंखों से इधर उधर ताकते हुए बोला
“सुना है राहुल..आपका भतीजा आ गया है विदेश से …कुछ मॉल -वॉल का काम शुरु करने वाले हैं आप यहाँ …बंगले पर”
राव सर :- (सारी फाइल रखने के बाद बैग साइड में रखते हुए )
“हम्म सही सुना है …एक दो दिन में काम शुरू करेंगे “
नवीन :-“क्या आप बता सकते हैं कि किससे खरीदा है आपने ये बंगला “?
राव सर :-“हाँ ..क्यों नहीं ..माणिक चंद से…तुम क्यों पूछ रहे हो ?”
नवीन :-“ऐसे ही….मॉल की जरूरत क्या है ? …अच्छे खासे रहने की जगह है “
राव सर:- “इतना बड़ा हादसा हुआ है …वहाँ रहना तो दूर कोई झांकना तक नहीं चाहता …राहुल तो बड़ी मुश्किल से संयत होने भी लगा था …लेकिन … “
नवीन :-(राव सर के चेहरे पर नजर गढाते हुए )” लेकिन क्या”?
राव सर :” अंकित …बड़ा तमाशा कर दिया उसने …उसे लगता है अनामिका जीवित है …ना सिर्फ इतना बल्कि वो उससे प्रेम करता है और कहता है दो दिन पहले मिला है उससे “
नवीन :-” हो सकता है मिला हो…”
तब तक चाय आ गयी…. और बड़ी फुर्ती से नवीन ने कप उठा कर चाय में एक सिप कर लिया ..राव सर उसे घूर कर देखते रहे और बड़े संजीदा होकर बोले..
राव सर :-” नवीन …मौत हुई है उसकी…”
नवीन :-“क्या पता कोई रसूख वाला..पैसे के लिए झूठ बोल रहा हो ..लड़की को गायब कर दिया हो “
राव सर :-” और लड़की क्यों गायब करेगा कोई “?
नवीन :-” प्रोपर्टी के लिए लोग अपने संबंधी लोगों तक को मार देते हैं ….ये तो फिर भी लड़की को गायब कराना है ….’
राव सर :-“मुझे ऐसा क्यों लगता है ..अंकित मिला है तुमसे …”
नवीन :-” अगर मिला भी है तो …क्या बुराई है इसमें ?…सबको अधिकार है.. कानूनी मदद का “
राव सर :-” ये ना तो कानून है …और ना ही मदद …बस्स पागलपन है ..महीनों हो गए अनामिका की मौत को …तुम तो पुलिस में हो …फाइल उठा कर देखा होता “
नवीन :-“प्रोपर्टी के लिये लोग सालों साल घपला करते हैं …ये तो बस्स महीनों की बात है …वो दो दिन पहले ही मिला है उससे …पागल तो है नहीं अंकित …जो उसकी बात को झुठला दिया जाए …रही बात फाइल की..? बन्द फाइल को खोलने में देर कितनी लगती है..?
राव सर :-“ये तुम कह रहे हो? ..तुम वही हो ना ? जिसे रुचिका केस में अंकित सीधे -सीधे अपराधी लग रहा था”?
नवीन :-“शक था मुझे उस पर…शक करना हमारी ड्यूटी का हिस्सा है….जैसे (घूरते हुए ).. इस वक़्त… मुझे आप पर शक है”
राव सर:-(आवेग में आते हुए ) “तुम पागल हो चुके हो …सच कहते हैं लोग पुलिस वाले किसी के सगे नहीं हो सकते …निकल जाओ यहाँ से ..मैंने कहा नि…क…लो “
नवीन :-“मैं भी रुकने नहीं आया यहाँ..जल्द लौटूंगा..बंगले पर स्टे के आर्डर के साथ समझे चाचा जी
अपना अपना कैप मेज से उठाया और तेज़ी से चलता हुआ बाहर निकल गया …उसके बाहर निकलते ही राव सर ‘धम्म ‘ से कुर्सी पर बैठ गए ,खुद को संयत करने के लिए ,उन्होंने उंगलियों को बालों में फेरते हुए आंखे बंद कर ली ..