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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट – 17

पार्ट – 17 by Sonal Johari Details Summery वो सबके बीच आ गई नाचते नाचते . उसके पैर जादुई तरीके से थिरक रहे थे ..उनकी फुर्ती देखते ही बनती थी ..एक अजीब समा बंध गया था .. लोग उसे अपलक देख रहे थे .. और उसके नृत्य से मुग्ध होने लगे थे.. अब वो नाचते -नाचते अपनी सुध -बुध खो बैठी थी.. एक अनजाना डर मधुर के मन में कौंधा और अब तक उसके पैर जमीन से ऊपर उठ चुके थे .. Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt राव सर :–इतना कह देने से काम नहीं चलने वाला..अंकित तुम्हे उस प्रोजेक्ट में काम करना होगा ..मेहनत करनी होगी…हम शॉपिंग मॉल बनायेंगे “ “लेकिन सर मुझे इसका कोई अनुभव नहीं ” अंकित ने कहा तो राव सर बोले “क्या तुम्हें पर्सनल अस्सिस्टेंट का अनुभव था अंकित”? अंकित चुप हो गया, तो राव सर बोले ,”अंकित.. ना सही इस बिज़नेस की नॉलेज लेकिन कम से कम ये तो बताओगे प्लान कैसा है …जो योजनाएं हम बनाये उस पर अपनी राय रखो …और बेहतर कैसे हो …इस पर सुझाव दो..ऐसा तो कर पाओगे? अंकित :- “बहुत खुशी से सर “ राव सर :– ठीक है,में तुम्हे मिलाता हूँ राहुल से.. उन्होंने एक्स्टेंशन पर फ़ोन किया “राहुल …जरा मेरे केविन में आओ “ ऑफिस के ही एक दूसरे केविन में बैठा वो काम कर रहा था …जल्दी ही राव सर के सामने आ कर बैठ गया…उसे देख अंकित अपनी सीट से उठ कर खड़ा हो गया …राव सर बोले “ये हैं राहुल …मेरे भतीजे …अमेरिका से हाल ही में लौटे है..आर्किटेक्ट हैं ये ही उस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं.. मुझे यकीन है तुम राहुल के साथ रहे तो ये ज्यादा बेहतर तरीके से और उत्साहित होकर काम कर पायेगा ” राव सर की कोई बात अंकित के कानो में नहीं पहुंची बस्स उसके चेहरे पर गुस्से ,नफरत और आश्चर्य के भाव आ गए थे …राहुल को देखकर .. एकाएक सब याद हो आया ..अंकित के दिमाग मे जैसे पूरी रील चल गई हो …उसका बाज़ार में मिलना ..टकराना ..अनामिका का फोटो गिर जाना.. फिर उसका अनामिका के घर के बाहर खड़े होकर फ़ोटो क्लिक करना …और घर मे जाकर उसके मुँह पर पंच मारना … उसने अपने मन मे कहा …तो ये मस्कुलर ..राव सर का भतीजा है…अब मुझे ये पहचान लेगा और राव सर मुझे जॉब से तो निकालेंगे ही साथ ही साथ जो मुझसे प्रभावित रहते हैं ..जब इस राहुल से सुनेंगे कि मैंने मारपीट की है इसके साथ ..तो हो सकता है जॉब से निकालने के साथ ..बुरा भला भी कहें… ठीक है ..जो होगा देखा जाएगा … “क्या सोच रहे हो अंकित… राहुल कब से तुमसे हाथ मिलाना चाह रहा है…कहाँ खोये हो ?” राव सर ने कहा तो, अंकित अपनी सोच से बाहर आया देखा तो हाथ बढ़ाये वो मस्कुलर यानी राहुल उसी की ओर देख रहा था … “कुछ नहीं सर..कुछ भी नहीं सॉरी वो जरा ” हड़बड़ाते हुए अंकित के मुँह से निकला…. और उसने अपना हाथ बढ़ा कर राहुल के हाथ पर रख दिया ……बड़े गर्मजोशी से हेंडशेक किया.. Part-18

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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट -15

पार्ट -15 by Sonal Johari Details Summery वो सबके बीच आ गई नाचते नाचते . उसके पैर जादुई तरीके से थिरक रहे थे ..उनकी फुर्ती देखते ही बनती थी ..एक अजीब समा बंध गया था .. लोग उसे अपलक देख रहे थे .. और उसके नृत्य से मुग्ध होने लगे थे.. अब वो नाचते -नाचते अपनी सुध -बुध खो बैठी थी.. एक अनजाना डर मधुर के मन में कौंधा और अब तक उसके पैर जमीन से ऊपर उठ चुके थे .. Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt “आप को नहीं लगता..आपने कुछ महंगा सौदा कर लिया” उसने मुस्कुराते हुए पूछा “नहीं …बल्कि सस्ता…अंकित दूर की कौडी साबित होगी. “ बड़े इत्मीनान से राव सर ने पानी का गिलास उठाया और घूंट भरते हुए कहा “मतलब “उसने भौंहें सिकोड़ते हुए पूछा “मतलब ये …उसे मैं जो भी काम सौंपता हूँ ..ना सिर्फ वो उसे बेहतरीन तरीके से करता है , बल्कि एक नई उम्मीद भी लेकर आता है हमेशा ..मेरे काम को वो बहुत अच्छी तरह से बढ़ा सकता है.” “इतना भरोसा है आपको उस पर ” उसने मुस्कुरा कर कहा “नहीं… खुद पर…और मत भूलो ..एक अच्छा जौहरी ही सच्चे हीरे की कीमत जानता है… उन्होंने कुर्सी से उठते हुए कहा …और दोंनो ऑफिस से बाहर निकल गए *** वो आज बाहर ही थी..पौधे लगा रही थी..बालों को हल्का सा बांधे… ढीले कपड़े पहने..लंबी बाहों वाली ड्रेस कभी हथेलियों तक आ जाती तो दांतो से पकड़ ..उसे ऊपर की ओर खींचती…तो कभी ठीट बाल जो चेहरे पर आ जाते… तो उन्हे सिर झटक पीछे कर देती …मिट्टी में सनी भी कितनी खूबसूरत लग रही है ..वहीं उसके घर की सीढ़ियों पर बैठ वो हथेली पर अपना चेहरा टिका उसे निहारने लगा… मिट्टी में खाद मिलाकर उठी और थोड़ी दूरी पर रखा हुआ गमला उठाया, शायद भारी वजन के कारण लड़खड़ा गयी ..इससे पहले कि गिरती ,अंकित ने दौडकर उसे और सीमेन्ट के गमलें दोनों को संभाल लिया…अंकित को देख वो खुश हो गयी ..अंकित अपने एक हाथ मे उसे थामे था.. दूसरे में सीमेंट के बने गमले को …कुछ पल यूँ ही एक दूसरे को देख बीत गए …वो चिहुंक कर खुश होते हुए बोली “तुम कब आये “ अभी बस्स कुछ ही मिनट पहले “ “हाथ नहीं दुख रहे तुम्हारे ” उसने पूछा “तुम फूलों सी नाजुक और हल्की…सारी जिंदगी ऐसे ही उठाये रख सकता हूँ” “और इस गमले को भी ” उसने गमले की ओर इशारा करते हुए कहा …तो अंकित ने मुस्कुराते हुए गमले को नीचे रख दिया और बोला “ओह्ह..जब तुम सामने होती हो ना …मुझे कुछ नहीं दिखता ” और झुककर उसने अनामिका के होठों को चूम लिया .. “बताया क्यों नहीं …कब से आये थे ? उसने हटते हुए कहा “बता देता ..तो ये खूबसूरत नजारा कैसे देख पाता “ “खूबसूरत …फिर अपने दोनो हाथ उसे दिखाते हुए “देखो जरा …मिट्टी लगे ये हाथ क्या खूबसूरत हैं इनमें” “तुम नहीं समझोगी “ “क्यों …ऐसा भी क्या है”? “कहा ना ….नहीं समझोगी” “बताओ भी..” “बस्स यही ..तुम कैसे भी हाल में हो… मुझे सुंदर ही दिखती हो .” वो अनामिका की आंखों में देखते हुए बोला ..और कुछ पल दोनों एक दूसरे को अपलक ऐसे ही देखते रहे..फिर वो बोली.. “अच्छा रुको…बस्स पांच मिनट में आई ” और अंदर मुड गयी …अंकित भी उसके पीछे – पीछे अंदर चला गया.. जब तुम ऐसे बोलती हो ना …मुझे बिल्कुल घबराहट नहीं होती” वो सोफे पर बैठते हुए बोला.. “घबराहट होनी भी क्यों चाहिए “? उसने पलटते हुए पूछा “”इंतज़ार करने के ख्याल से घबराहट होना लाज़िमी है लेकिन,…मुझे तुम्हारा इंतज़ार नहीं करना पड़ता ,जब तुम बोलती हो..पांच मिनट में आई …लेकिन आ तुम चार मिनट में ही जाती हो….बस्स हमेशा ऐसी ही रहना शादी के बाद भी..रहोगी ना”? वो मुस्कुरा दी तो अंकित ने कहना जारी रखा”मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान हूँ.और जल्द ही एक खुशनसीब पति भी बंनने वाला हूँ…चेंज करने जा रही हो ना ? अनामिका:-“हम्म” अंकित:-“मिट्टी लगे ये हाथ .बिखरे बाल …तुम ऐसे भी खूबसूरत लग रही हो ..यकीन करो..मेरी आँखों से देखो” अनामिका:–ऐसे भी ? (आँखे बड़ी करते हुए ).लड़के कभी खूबसूरती नोटिस करना नहीं भूलते …ना..”? शरारत से मुस्कुराते हुए बोली वो अंकित:–“कभी नहीं.. कम से कम मैं तो कभी नहीं…. हो सकता है कुछ अपवाद हो…इसीलिए मैं कहूंगा ..की सौ में निन्यानबे परसेंट तुम ठीक कह रही हो.” बड़े खुश होते हुए बोला और अपने बनाये हुए नोट्स देखने लगा ,अनामिका उसकी ओर बड़ी प्रभावित होकर ..प्यार से कुछ देर अपलक देखती रही..फिर दौडती हुई उसकी ओर आयी …अंकित ने देखा तो उठकर अपनी बाहें खोल दी ..और अनामिका उनमे समां गई … कुछ पल ऐसे ही बीत गए “तुम ठीक तो हो ..अंकित ने उसके बालों में हाथ फेरते हुए पूछा तो उसने हाँ में सिर हिलाया…तो अंकित बोला “चिंता रहती है… मुझे तुम्हारी हमेशा …समझ नहीं आता क्या करूँ” अनामिका :–“तुम भी …अच्छा रुको ..अभी आयी “ अनामिका बोली और अंदर चली गयी थोड़ी ही देर में बापस आयी तो एक आसमानी कलर की साड़ी पहने हुए… “बिल्कुल परी लग रही हो…बात क्या है आज”? अंकित ने खुशी से पूंछा “बात ये है ..आज हम घूमने जा रहे हैं ”  “सच”? “हाँ ..हाँ..” उसने बाहर निकलते हुए बोला “मुझे तो अब तक यकीन नहीं हो रहा” अंकित बोला और उसके पीछे हो लिया… …… अभी थोड़ी दूर ही निकल पाए होंगे कि सामने सड़क पर सूरज आता दिखा..अंकित ने उसे देखा तो बोला  “अनामिका वो देखो ..सूरज ..वो जिसकी मैं बात कर रहा था” उसने उंगली का इशारा सूरज की ओर कर उसे बताया अनामिका:-“हम्म …अच्छा”  अंकित :-“क्या अच्छा… चलो मिलाता हूँ” और अनामिका कुछ बोलती… इससे पहले ही अंकित ने  सूरज को आवाज लगा दी और इशारे से पास बुला लिया..सूरज ने अंकित को देखा तो दौड़ा आया “अरे यार तुम यहाँ कहाँ ?” उसने सिगरेट का कश खींचते हुए कहा “बस्स ऐसे ही ..अच्छा इनसे मिलो…”कुछ आगे बोल पाता…इससे पहले ही तेज़  हवा का एक बबंडर सा उठा और देखना तो दूर..खड़े रह पाना मुश्किल हो गया तीनो का… “हे ये क्या हो गया अचानक ” …सूरज ने अपना चेहरा ढकते हुए कहा 

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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट -14

पार्ट – 14 by Sonal Johari Summery वो सबके बीच आ गई नाचते नाचते . उसके पैर जादुई तरीके से थिरक रहे थे ..उनकी फुर्ती देखते ही बनती थी ..एक अजीब समा बंध गया था .. लोग उसे अपलक देख रहे थे .. और उसके नृत्य से मुग्ध होने लगे थे.. अब वो नाचते -नाचते अपनी सुध -बुध खो बैठी थी.. एक अनजाना डर मधुर के मन में कौंधा और अब तक उसके पैर जमीन से ऊपर उठ चुके थे .. Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt अनामिका ने उसका मन रखने को थोड़े से सामान की लिस्ट दे दी थी… लेकिन अंकित तीन चार महीने का राशन उठा लाया …आज पहले से दरवाजा खुला था …सोफे पर उसकी कुछ किताबें रखी थी …अंकित के मन मे आया ‘कहीं ऐसा तो नहीं कि आजकल ये लड़की पढ़ाई करती ही ना हो उसके प्यार में पड़…नहीं …नहीं ये तो बहुत गलत हो जाएगा… वो आती दिखी …अपने बालों को मोड़ जूड़ा बनाती हुई ..अंकित ने उसे रोक दिया “खुले रहने दो ना …वो मुस्कुराई और बालों को छोड़ दिया …गोल गोल घूमते हुए वे खुले और बिखर गए …उसने उन्हें हल्के से पीछे की ओर धकेल दिया …और कुछ बाल मनमानी सी करते हुए उसके चेहरे पर आ गए … अंकित के चेहरे पर मुस्कान आ गयी “आज खुश दिख रहे हो” उसने पूछा “हम्म …एक नया लड़का आया है सूरज , बहुत मजाकिया है … “तुमसे जरा सा सामान मंगाया था,पूरा मार्केट उठा लाये तुम तो” “मेरा वश चले दुनिया तुम्हारे कदमों रख दूँ…. अभी देखी ही कहाँ है तुमने चाहत मेरी “ “ओह्ह ….हा हा हा बस्स भी करो ” वो हँसने लगी और कॉफी ले आयी … कॉफी में चीनी डालने लगी” अंकित उसे रोकते हुए…”अरे …अरे बस्स आधा चम्मच …कम चीनी लेता हूँ अब…. सुनो…तुमने पढ़ाई बन्द कर दी क्या ? “कॉफी सिप करते हुए अंकित ने पूछा “नहीं तो …मुझे याद है गोल्ड मेडल चाहिये मुझे “ “बहुत अच्छे …में तो घबरा ही गया था…मैं चाहता हूँ ..तुम किसी रिसर्च वर्क से जुडो ताकि लोग भी जाने मेरी आनामिका कितनी होशियार है..मैं पैसे कमाऊंगा तुम नाम कमाना “.और अनामिका के हाँ में सिर हिलाते ही ….चलो तुम्हारी टेरेस पर चलें” कहते हुए वो सीढ़िया चढ़ने लगा…मौसम बहुत सुहावना था…अंधेरा होने लगा था …उसके बाल उड़ उड़ कर अंकित को छू रहे थे …उसे हल्की गुदगुदी का एहसास हो रहा था बोला “जानती हो …जब तुम पहली बार मिली थी …ये मुझे ऐसे ही छू रहे थे…पहली नज़र बालों पर ही गयी थी तुम्हारे…इनका खास ख्याल रखा करो …बहुत खूबसूरत हैं और मुझे बहुत पसंद भी हैं” वो मुस्कुरा दी और अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया “हमेशा मुझसे पूछती हो …कितना प्यार करते हो…अनामिका …तुम कितना करती हो “? “बेहद …” उसने आंखे बंद किये ही जवाब दिया “हे …तुम सूरज से मिलोगी ..चलो ना अनामिका ..तुम्हे उससे मिलकर बहुत अच्छा लगेगा “ “..पता नहीं कौन कैसा हो …मैं नहीं मिल सकती किसी से “ “क्यों भला ..मैं हूँ फिर तुम्हें सोचने की क्या जरूरत”? “तुम क्यों नहीं समझते “वो चिढ़ती सी बोली …दोनों थोड़ी देर चुप रहे … “मैं बताता हूँ ना, कि कैसे समझाना है मुझे…. ये जो तुम्हारे सामने पड़ा है …क्या है ये “? अंकित ने कहा “ये ?( उसने हाथ मे उठाते हुए पूछा ) अंकित :-“हम्म ये” अनामिका:-“पत्थर है” अंकित:- “भारी होगा? अनामिका:- “हूँ… है तो अंकित:–‘इसे उठाओ और मेरे सिर पर दे मारो ‘ अनामिका:–“ये क्या …तुम भी ? उसने आँखे दिखाते हुए कहा अंकित:– “क्या मैं भी ?..जब समझ मे कुछ आता नहीं तो ये सिर किस काम का… बोलो ..ऐसे ही समझाना पड़ेगा ना” अनामिका:– हा हा हा तुम भी …. अंकित:-“ बताओ ना क्या करुँ अनामिका:-“”हा हा ओह्ह ..कितनी प्यारी बातें करते हो तुम ….मन करता है तुम्हे ले जाऊँ कहीं दूर सबसे अंकित :–“ये तुम्हे प्यारी बाते लग रही हैं?(बनावटी गुस्से से) हद्द है ..हुम्म तुम ले जाओगी मुझे..मुझे ? बिना दिमाग वाले अंकित को “? वो बेतहाशा हँस रही थी ..हँसते हँसते उसने अपना सिर फिर उसके कंधे पर रख दिया ….अंकित भी थोड़ी देर बाद हँसने लगा ..हल्की ठंडी हवा से उसके बाल उड़ उड़ कर अंकित को छूने लगे…. *** राव सर ने इंस्पेक्टर नवीन को देर शाम अपने ऑफिस में बुला लिया था.. वो सादा ड्रेस में राव सर के सामने बैठा था …और राव सर का मंगाया नॉनवेज डिनर जो कि सिर्फ नवीन के लिए था…उसे बड़े चाव से खा रहा था … “पुलिस की मदद करनी चाहिए जैसा कि लोग कहते हैं” राव सर ने कहा चिकन के लेग पीस को दांतों से दवाते हुए नवीन के मुँह से “हम्म” निकला “नवीन…पता है तुम्हें … एक दूर की रिश्तेदारी में तुम मेरे भतीजे भी लगते हो ” राव सर बहुत मीठे शब्दों का प्रयोग कर रहे थे नवीन :–“हम्म” राव सर :-“तो अंकित के पीछे क्यों समय बर्वाद करते हो…इस केस को दूसरे एंगल से क्यों नही देखते … नवीन :-“अंकित कहता है …ट्रक का नंबर नोट नही किया उसने…आपको लगता है ऐसा हो सकता है “? उँगलियों पर लगे चावलों को जीभ से चाटते हुए बोला राव सर:–“वो कर सकता है ऐसा… बल्कि तुम भी होते तो ऐसा ही करते …पुलिस के नजरिये से ना देख कर सामान्य इंसान की तरह सोचो …तो लगेगा …स्वाभाविक है..समय रहते वो, उसे ना बचाता तो मर जाती रुचिका, ….समय ही खराब करना है अंकित पर शक करके ” राव सर ने बड़े विश्वास से कहा “आप उसे बचाने में इतना जोर क्यों लगा रहे हैं ” नवीन ने चिकन करी में मिले चावलों का गोला सा बना मुंह मे रखते हुए कहा राव सर:–“क्योंकि पिछले पैंतीस सालों के अनुभव है मुझे ,इंसान को पहचानने का,जानता हूँ वो बेक़सूर है …तुम दोंनो ही …जरूरी हो मेरे लिए… अंकित से ध्यान हटेगा तुम्हारा ,तब तो असली गुनाहगार सामने आएगा …और अंकित मेरे ऑफिस के लिए बहुत जरूरी है ….जहां तक मुझे यकीन है… तुम भी जानते हो,कि अंकित बेबकुफ़ भले ही है ,लेकिन है.. बेक़सूर “ नवीन :–“हम्म ” बीयर की बोतल उठा नवीन ने मुँह में उड़ेल ली राव

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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट – 13

पार्ट -13 by Sonal Johari Summery “फिर क्यों साधु बने घूमते हो..मेरी मानो ,ऐसे लड़कों को लड़कियां लल्लू समझती हैं …इन्ही आदतों की वजह से तुम अकेले हो ,यकीन करो …..लो (अपनी सिगरेट देते हुए ) एक कश ले लो …जन्नत महसूस होगी Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt राव इण्डस्ट्री ————– अंकित.. मीटिंग में हुई बातचीत पर काम कर ही रहा था…कि नीरू घबराई सी, पास आकर बोली “अंकित…एक बुरी खबर है” अंकित ने हाथ मे पकड़ी हुई फाइल एक तरफ रख दी और किसी अन्जाने डर से उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गयी ………. “क्या हुआ ” अंकित ने अपनी सांस रोकते हुए पूँछा ” रुचिका…” फिर मुंह पर हाथ रख रोने लगती है ..अंकित ने उसके पास जाकर पूँछा “मुझे बताओ नीरू…बड़ी घबराहट हो रही है ..रुचिका ठीक है ना”? “नहीं…. अंकित …वो कोमा में चली गयी है…डॉ कहते हैं…उन्हें नहीं पता …उसे कब तक होश आएगा” दोनो हाथों से अपना मुंह ढँक कर उसने जोर से सिसकी ली “शै …”अंकित के मुंह से निकला …अंकित अपनी दोनों हाथो की उंगलियों को आपस मे फॅसा अपने होंठों पर रखते हुए कुछ देर चुप खड़ा रहा उसकी आँखों मे आंसू भर आये..फिर दोनों हाथों का पंच बना अपनी डेस्क पर मारते हुए कहा…”कुछ सेकंड …बस्स कुछ सेकेंड और मिल जाते तो.. वो कमीना मेरे हाथों से बचता नहीं..ओह्ह …इतनी बड़ी बेबकूफी कैसे हो गयी मुझसे “अंकित ने झुंझलाते हुए कहा “आप दोनों को सर ने बुलाया है इसी वक्त ” संपत आकर बोला …तो दोनो ने खुद को संयत किया और राव सर के केविन तक पहुँचे…”क्या तुम दोंनो को पता लगा रुचिका के बारे ? उन्होंने पूछा तो दोनों ने हामी में सिर हिलाया…राव सर ने आगे कहा “मैं उसे प्यार से सुरुचि कहता था..बेहद होशियार… मेरे ही रिक्वेस्ट पर यहाँ आयी थी…आह …अंकित… ट्रक का नम्बर ना लेकर गलती हुई है तुमसे, जहाँ एक तरफ वो हॉस्पिटल में हैं वहीं दूसरी तरफ तुम पुलिस के शक के घेरे में” अंकित और नीरू कुछ देर शांत खड़े रहे …थोड़ी देर की खामोशी के बाद राव सर ने कहा “ईश्वर ने चाहा तो जल्द ही सही होगी वो…मैंने तुम दोनो को रुचिका के ऑक्सीडेंट के बारे मे किसी को भी बताने के लिए इसलिए रोका था…कि मैं नहीं चाहता ऑफिस में बेकार की बातें बने…और काम प्रभावित हो…वैसे भी जो करना है ,डॉ को करना है…तुम लोगों का क्या सुझाव है इस बारे में “ “आप ठीक कहते हैं सर” दोनो ने एकसाथ कहा “हम्म…ठीक है,… नीरू तुम जाओ …अंकित कैसी रही मीटिंग्स “? “सब अच्छी हुई सर…लेकिन मुझे गोपाल दास के साथ हुई मीटिंग सबसे बेहतर लगी” “वो …जिनका जैम और जैली है”? “जी सर” “उसमे क्या खास लगा तुम्हें “ “इंडिया ही नहीं बल्कि विदेशों में भी गोपाल एक बहुत पॉपुलर ब्रांड बन चुका है…”फिर फाइल सौंपते हुए “ये देखिये सर..पिछले दो सालों में इनकी ग्रोथ लगातार बढ़ रही है साथ ही…उनके साथ काम करने के रूल और रेगुलेशन बहुत आसान हैं” “हम्म …अगर तुम्हें इतना ही विश्वास जनक लगा तो डील करनी चाहिए थी.. क्यों नहीं की”? राव सर फाइल के पन्ने पलटते हुए बोले “इतनी बड़ी डील करते हुए…. मुझे बड़ा डर लगता है सर” “(हँसते हुए ) हम्म …ठीक है ,तुम्हारे डर पर भी काम करते हैं…एक काम करो गोपाल दास के साथ मीटिंग फिक्स करो मेरी “ “जी सर..” कहने के बाद भी जब अंकित वहीं खड़ा रहा तो उन्होंने पूछा “कुछ और कहना चाहते हो क्या? …बोलो” “सर …वो नवीन ने मुझसे कहा कि उसे, सबसे ज्यादा शक मुझ पर ही है …मैं “ “परेशान मत होओ अंकित…..इस ऑफिस में काम करने बाले किसी भी सख़्श को एम्प्लॉयर नहीं मानता मैं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानता हूँ…तुम बस्स काम पर ध्यान लगाओ…इतना ध्यान रखना कि उससे कोई भी बात अकेले में मत करना …मेरे सामने ही करना …बाकी मैं देखता हूँ” “बहुत धन्यवाद सर” बोलकर अंकित बाहर निकल आया *** राव इंडस्ट्री , अगले दिन ,अंकित राव सर के कहे अनुसार एक लेटर टाइप कर रहा था… “अंकित …बिना एच. आर.काम नहीं चलेगा ..लेकिन अभी मैं ये भी नहीं चाहता,कि कोई नया एच. आर .आये, इसीलिए मैंने एक जान पहचान वाले लड़के को बुलाया है …ताकि काम मिल जुल कर हो जाये ,तुम ,नीरू और वो लड़का मिलजुलकर काम संभाल लें.. “ठीक है सर” “तुम उस पर नजर बनाए रखना …अब तक तो उसे आ जाना चहिये था” कलाई पर बंधी घड़ी की ओर देखते हुए राव सर बोले तभी एक चौतीस पैंतीस साल का युवक पहुंचता है.छरहरे बदन का बेहद औसत नाक नक्श का जिसकी लम्बाई पांच फीट और ग्यारह इंच की रही होगी ..देखने से अनुभवी लगता था…आते ही मुस्कुराहट के साथ बोला ” सर,…में आई कमिन “? “हाँ हाँ …आओ तुम्हारा ही इंतज़ार था …अंकित.. ये हैं सूरज और सूरज ये हैं अंकित ये तुम्हे नीरू से भी मिला देंगे, फिलहाल तो मैंने डेस्क पर कुछ फ़ाइल रखवा दी हैं…उन्हें देख लो ….फिर अंकित से “अंकित ,मीटिंग से आकर मिलता हूँ तुमसे…तुम ये लेटर ड्राफ्ट कर दो “ राव सर के जाने के बाद सूरज डेस्क पर जाकर अपना मोबाइल निकाल कर उस पर गेम खेलने लगता है …अंकित जब बाहर आता है तो सूरज को गेम खेलते देख उसे हँसी आ जाती है ,लेकिन उससे कुछ ना बोल वो अपने केविन में आ जाता है ,थोड़ी देर बाद “क्या आपके पास लाइटर है “ अपने काम मे मशगूल अंकित ने जब नजर उठाई तो सामने सूरज केविन के गेट पर खड़ा था “माफ करना दोस्त,लाइटर तो नहीं मेरे पास ” अंकित ने बड़ी नर्मता से कहा और अपने काम मे लग गया … “हम्म…तो सिगरेट तो होगी …लाओ वही दो …लाइटर कहीं और से ले लूँगा” सूरज ने ऐसे कहा जैसे वो अंकित को सालों से जानता हो “सिगरेट भी नहीं मेरे पास ” अंकित ने जवाव दिया “मतलब ….तुम सिगरेट नहीं पीते “? उसने आश्चर्य से कहा “जी…हाँ …नहीं पीता ” बड़ा सटीक जवाब दिया उसने “अब ये मत कहना कि तुम अल्कोहल भी नहीं लेते “? “कहना क्या…जो सच है सो है….नहीं लेता ” अंकित बड़े उखड़े मन से बोला “बहुत

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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट – 12

पार्ट -12 by Sonal Johari Summery मेरी माँ इसे अपनी बहू को देना चाहती थी पता नहीं तुम्हे नथ पहनना पसंद भी होगा या नहीं लेकिन …” इससे पहले कि अपनी बात पूरी कर पाता अंकित…अनामिका ने वो नथ पहन ली..लाल हरे दानों वाली नथ पहने वो बेहद खूबसूरत दिख रही थी Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt अंकित चारो मीटिंग अच्छी तरह से करने के बाद घर पहुंचा …और वहां से अनामिका में घर पहुंच गया ..पहले ही तय कर चुका था कि रुचिका के बारे में कुछ नहीं बताएगा अनामिका को,,.अंदर पहुँचा तो देखा, सामने सीढियों से उतरती वो …सफेद ड्रेस पर पड़ती नीली आभा में …यूँ मालूम हुई जैसे पहाड़ो से नदी निकलती है…अंकित उसे तब तक अपलक देखता रहा जब तक कि वो उसके ठीक सामने नहीं आ गयी…. अनामिका:–“ऐसे क्या देख रहे हो …हम्म” अंकित:-“नहीं .कुछ नहीं…बस्स ये कि तुम कितनी खूबसूरत हो….अच्छा चलो ….जल्दी चलो “ अंकित उसका हाथ पकड़ कर बोला अनामिका:–“कहाँ ….कहाँ चलना है” अंकित -:–“शॉपिंग करने चलो …मेरी जेब के सारे पैसे खर्च कर दो” अनामिका:–“अच्छा “ अंकित:–“हाँ… हाँ…. फिर मैं तुम्हारे सारे शॉपिंग के बैग उठाकर पीछे पीछे चलूँगा,और तुम एक प्रिन्सेज़ की तरह आगे आगे “ अनामिका:-(मुस्कुराती हुई) अच्छा …तो तुम फिर पूरे महीने क्या करोगे “? अंकित:–“मैं अपनी कम्पनी से एडवांस ले लूंगा…”अंकित बडे खुश होते हुए कहा अनामिका:–मन ही मन ये नहीं कहोगे,कि कैसी प्रेमिका है मेरी,जिसने सारे पैसे खर्च करा दिए …जेब खाली करा दी “ अंकित:–“नहीं बिल्कुल नहीं ..तुम्हे पता नहीं है हम लड़कों का, एक तरफ जेब खाली होने का रोना भी रोते रहेंगे …और मन ही मन ये सोच कर खुश भी होते रहेंगे कि कोई है,जो हम और हमारे पैसों पर इतना हक़ रखता है” अनामिका:–अच्छा अंकित:– हम्म….चलो ना (अंकित मनुहार करते हुए बोला) अनामिक :–सुनो अंकित, मेरे पापा को ये पूरा शहर अच्छे से जानता है,किसी ने अगर तुम्हारे साथ मुझे देख लिया तो बहुत मुश्किल हो जाएगी ?..बताओ …मैं जरूरी हूँ या शॉपिंग ? उसने अंकित को पूछते हुए कहा अंकित:- “…. बेशक तुम..”..(फिर कुछ सोचते हुए ) ठीक कहती हो…एक काम करो तुम मुझे एक लिस्ट बना कर दो मैं सब सामान ले कर आऊँगा…तुम्हारे लिए …” अनामिका के हामी भरते ही … अंकित ने अपनी जेब से एक छोटा सा पैकेट निकालकर अनामिका को सौंपते हुए कहा “मेरी माँ इसे अपनी बहू को देना चाहती थी पता नहीं तुम्हे नथ पहनना पसंद भी होगा या नहीं लेकिन …” इससे पहले कि अपनी बात पूरी कर पाता अंकित…अनामिका ने वो नथ पहन ली..लाल हरे दानों वाली नथ पहने वो बेहद खूबसूरत दिख रही थी , “कैसी दिख रही हूँ” उसने कहा और उठकर जाने लगी तभी अंकित ने उसका हाथ पकड़ा और अपने पास बैठाते हुए बोला “यहीं मेरे सामने बैठो …मन करता है ..तुम्हे देखता रहूँ” अनामिका:–“ओह्ह बड़े आये…देखता रहूँ…हा हा “ वो हँसती हुई उठकर तेज़ी से सोफे के पीछे चली गयी …अंकित “अरे ..अरे ” करता हुआ उसके पीछे .अनामिका वहां से भागती हुई गेलेरी में …और फिर सीढ़ियों पर, अंकित उसके पीछे -पीछे जा रहा था और सीढयों पर रोककर उसे बाहों में कसते हुए बोला ” अब”? “सरेंडर…” अनामिक ने कहा ,और अपना सिर, अंकित के सीने पर टिका दिया…. दोनों मुस्कुरा उठे… Part-13

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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट -11

पार्ट – 11 by Sonal Johari Summery अब ये देखिये जरा (नवीन अभिनय करता हुआ बोला) बता कलुआ ,स्साले तूने चोरी की क्यों …कितना सूट करता है ना ” नवीन ने अपनी बात खत्म करने के साथ जो स्माइल दी ,तो राव सर बुरी तरह खीज़ गए Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt अंकित पास पहुंच तो देखा…रुचिका की कार उल्टी पड़ी थी सड़क पर .. उसके पहिये अब भी घूम रहे थे…रुचिका की आंखे बंद थी और उसका सिर स्टेरिंग पर था…आगे बढ़ा ही था,कि नीरू ने उसे रोकते हुए कहा”अंकित हमें पुलिस को कॉल करनी चाहिए …ये पुलिस केस है “ “क्या बकवास कर रही हो…जब तक पुलिस आएगी ,इसके जीवित रहने की उम्मीद खत्म हो जाएगी” “हम बेकार में पुलिस केस में फंस सकते हैं ” डर और घबराहट में उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे “तुम डरो मत …बस्स बाहर रोड से किसी टैक्सी को रोको …जा… ओ “अंकित ने चीखते हुए कहा और रुचिका को कार से निकालने की कोशिश करने लगा ..थोड़ी देर स्तब्ध खड़ी रही नीरू ….फिर जैसे चेतना आयी हो, …अंकित की मदद करने लगी … मिनटों की कड़ी मशक्कत के बाद रुचिका को कार से निकाल पाया दोनों ने ,रुचिका के हाथ और पैरों से खून बह रहा था …जहाँ नीरू ने उसका सिर पकड़ा, वही अंकित ने उसे पैरों से पकड़ा और …सड़क तक लाये, टैक्सी लेकर हॉस्पिटल पहुंचे …डॉक्टर ने देखते ही आई. सी .यू. में भर्ती कर लिया नीरू ने ,राब सर और रुचिका के पेरेंट्स को फ़ोन कर दिया..कुछ मिनट ही बीते होंगे कि रुचिका के पेरेंट्स हॉस्पिटल आ गए अधीर और दुख में डूबी रुचिका की मां को अंकित ने आगे बढ़के संभाला… “हाँ सुधीर …हम पहुंच गए हॉस्पिटल …हाँ …हाँ करता हूँ तुम्हे फ़ोन” फ़ोन पर बात करते हुए रुचिका के पापा पहुंचे..सुधीर का नाम सुन ,अंकित ने प्रश्नवाचक निग़ाह से नीरू की ओर देखा तो वो दबती हुई आवाज में बोली “सुधीर …रुचिका का भाई “ “क्या हुआ मेरी बेटी को? कहाँ है वो..कितनी चोट लगी है? फिर अंकित का हाथ पकड़कर “आप ही लेकर आये उसे यहाँ …बताइये क्या हुआ था” रुचिका के पिता ने आँसू भरी आंखों के साथ अंकित से पूछा “अं…. कि… त..”.राव सर ,संपत लाल के साथ आ गए थे “क्या हुआ?…रुचिका कैसी है?…हुआ कैसे ये सब .”? राव सर ने एक सांस में इतने सवाल पूछ डाले “सर..मुझे आज सुबह थोड़ी सी चोट लगी थी . तो ..” अंकित ने कहना शुरू ही किया कि “मुझे सिर्फ ये जानना है,रुचिका का एक्सीडेंट कैसे हुआ” ?राव सर ने अंकित को बीच में टोकते हुए रोक दिया “नीरू और रुचिका ऑफिस से बापस आते वक्त मेरा हालचाल लेने को रास्ते मे रुक गए, हम बात ही कर रहे थे कि तेज़ ट्रक ने रुचिका की कार में तेज टक्कर मार दी …और हम उसे हॉस्पिटल ले आये…वो आई.सी.यू. में है” जहाँ ये घटना सुन रुचिका की माँ और तेज़ रोने लगी, वही उसके पिता निढाल से सिर पर हाथ रख कुर्सी पर बैठ गए “नीरू …तुम ठीक हो ?” राब सर ने नीरू से पूछा “अंकित की चोट देखने मैं कार से बाहर निकल गयी थी …इसलिए मुझे कोई चोट नहीं आयी” नीरू ने जवाब दिया “हम्म….” इतने में इंस्पेक्टर नवीन आ गए और केस का व्यौरा जानना चाहा तो राव सर ने उन्हें ,अंकित से सुनी हुई बात बता दी …पूरी बात सुनने के बाद इंस्पेक्टर नवीन के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गयी “ये स्साले… ट्रक वाले भी टिका कर चलते हैं” “टिका कर …मतलब”? राव सर ने अपनी तीन उंगलियों को माथे पर रगड़ते हुए पूछा “हा हा हा… टिकाकर मतलब…शराब पीकर ” नवीन ने अपने हाथ का अंगूठा होंठो पर लगाते हुए कहा “मैं आपसे पूछता हूँ,कि क्या आप बिना गाली बात नही कर सकते “? राव सर ने चिढ़ते हुए पूछा “सर …आप जैसे कुछ इक्के दुक्के लोगों को छोड़ दिया जाए तो शायद ही कोई ऐसा होगा जो हम पुलिस वालों को गालियां ना देता हो…फिर हमें सोलह घंटे तो कभी -कभी तो चौबीस घंटे काम करना पड़ता है…अपराधियो से ही वास्ता पड़ता है हमारा”.. राव सर:–“हम्म…हम्म” इंस्पेक्टर नवीन;-“-और फिर सोच कर देखिये ,अगर मैं किसी अपराधी से पूंछू “बताइये ,भाई कलुआ,आपने चोरी क्यों की”…तो क्या लगता है आपको…कलुआ जवाब देगा ? और सूट भी तो नहीं करता …अब ये देखिये जरा (नवीन अभिनय करता हुआ बोला) बता कलुआ ,स्साले तूने चोरी की क्यों …कितना सूट करता है ना ” नवीन ने अपनी बात खत्म करने के साथ जो स्माइल दी ,तो राव सर बुरी तरह खीज़ गए और ये बोलते हुए कि “गलती हो गयी मुझसे …क्यों पूछा मैंने आपसे ” वहाँ से हट कर दूर बैठ गए… इंस्पेक्टर नवीन:- लो बोलो… ये क्या बात हुई…जब जवाब सुनने का धैर्य नहीं, तो सवाल पूछते क्यों हैं लोग? ….फिर बुदबुदाते हुए, ‘कभी कभी तो मुझे इस साले बुड्ढे पर शक होता है..ऊपर से सामान्य दिखने वाला ये बुड्ढा. कहीं अंदर से रंगीन मिज़ाज़ तो नहीं …हम्म …पता लगाना पड़ेगा” फिर अंकित की तरफ देखते हुए “और मिस्टर कृष्ण कन्हैया….(फिर एक तिरछी नजर नीरू पर डालते हुए) तो हुआ क्या था… अंकित ने सारी घटना सुनाते हुए कहा कि “आप कम से कम महिलाओं का सम्मान तो कर ही सकते हैं …या वो भी नहीं” “मुझे मत सिखाओ…वैसे तुमने ,जरूर ट्रक का नंबर नोट किया होगा…क्या नम्बर था”? “नहीं …मैं नोट नहीं कर पाया नंबर ” ,अंकित ने नजर नीचे किये ही जवाब दिया “क्या बकवास करते हो, में कैसे यकीन करूँ इस बात पर,बच्चा -बच्चा जानता है कि एक्सीडेंट की हालत में गाड़ी का नम्बर सबसे पहले नोट किया जाता है,…. “जानता हूँ..इस्पेक्टर …लेकिन उस वक़्त मुझे कुछ समझ ही ना आया …सिवाय रुचिका को बचाने के”अपनी गलती मानते हुए अंकित बोला “नम्बर नोट नहीं किया…या बताना नहीं चाहते ” इंस्पेक्टर नवीन ने उसे घूरते हुए कहा “आप कहना क्या चाहते हैं “? अंकित ने गुस्से में कहा “बस्स इतना कि …मुझे चलाने की कोशिश भी मत करना ” इंस्पेक्टर नवीन ने दांत भींचते हुए.. अपनी उंगली को अंकित की आंखों के बिल्कुल पास लाते हुए कहा. “साइलेंस प्लीज़…पेसेंट इस आउट ऑफ

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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट -10

पार्ट -10 by Sonal Johari Details Summery अंकित खुशी से अपनी एड़ी पर घूम गया.. खुशबूदार हल्की ठंडी हवा…नीले पहाड़ मानो किसी ने अभी अभी रंग भरा हो …एक छोटा और खूबसूरत तालाब और उसमें तैरती एक प्यारी सी बत्तख…अंकित खुशी से झूमता हुआ बोला Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt आज बाहर ही खड़ी थी उसे देखते ही मुस्कुराती हुई सामने आकर खड़ी हो गयी. बोली.. “तुम इस वक़्त “? अंकित ने खुशी से चमकती हुई उसकी आंखे देखी ,तो बड़ा खुश हो गया “हम्म,तुमसे मिलने का बहुत मन था” “अच्छा…सच “? “हम्म… चलो कहीं बाहर चलते हैं “उसने अनामिका का हाथ पकड़ते हुए कहा “बाहर “? “हाँ बाहर …किसी खूबसूरत जगह …चलो ना” “खूबसूरत जगह …कैसी “ “खूबसूरत …उम्म …जहाँ प्यारी हवा हो…दूर दूर तक कोई ना हो,तुम हो और मैं …बस्स . ..और वहाँ से ये खूबसूरत पहाड़ियां और खूबसूरत दिखे …” “अच्छा” “हाँ …घंटों वही बैठेंगे हम…फिर शाम को खाना और बापस …या फिर …बापस जाना भी क्यों …हम्म” उसने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा “जहाँ मैं ले चलूँ,वहां चलोगे “? “तुम तो कहीं भी ले चलो ..मना कर दूँ तो कहना…इस दुनिया तो क्या ..इस दुनियां के पार भी तुम्हारे साथ चलूँगा” “अच्छा”? “हाँ” “फिलहाल तो इसी दुनिया मे आओ” और अनामिका,अंकित का हाथ पकड़कर उसे बंगले के पीछे ले जाने लगी …जैसे ही बंगले के पीछे गए दोनो…अंकित खुशी से अपनी एड़ी पर घूम गया.. खुशबूदार हल्की ठंडी हवा…नीले पहाड़ मानो किसी ने अभी अभी रंग भरा हो …एक छोटा और खूबसूरत तालाब और उसमें तैरती एक प्यारी सी बत्तख…अंकित खुशी से झूमता हुआ बोला “इतनी खूबसूरत जगह यहां होगी ..मैंने सोचा भी ना था “ अनामिका वहीं खड़ी होकर अंकित को ऐसे खुश होते देख रही थी और हँस रही थी “अनामिका ये जगह तो कमाल है ” वो दोनों हाथ हवा में फैलाये आसमान की ओर देख रहा था “यहां आओ ना …मेरे पास बैठो “अनामिका बोली तो अंकित भागता हुआ उसके पास आकर बैठ गया … “सच कहूँ… बड़ी बेसब्री से तुम्हारे पेरेंट्स का इंतजार कर रहा हूँ…वो जल्दी से आये और मैं उनसे हमारी शादी की बात करूं”अंकित अपना सिर अनामिका की गोद में रखते हुए बोला “शादी इतनी जल्दी क्यों… ये वक़्त लौट कर नहीं आएगा …इसका अपना मज़ा है…नहीं है क्या”? “हम्म ..तुम भी ठीक कहती हो… तुम्हें खुश रख पाऊँ .और तुम्हारे पेरेंट्स भी खुश हों मुझसे मिलकर…इसलिए तरक्की करना भी जरूरी है” अनामिका ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया ,,तो अंकित उसे अपनी चोट दिखाते हुए बोला “देखो कितनी चोट लगी आज मुझे” अनामिका ने उसके घुटने को देखने के लिए हाथ बढ़ाया ..अभी उसका हाथ. दूर ही था…कि अंकित के मुंह से निकला “अहह …बहुत दर्द है” अनामिका ने उसके कंधे पर हाथ मारते हुए कहा “बड़े ड्रामेबाज हो तुम…चलो खाना खाते हैं” “तुम में बहुत खूबियां हैं …तुम खाना भी बहुत अच्छा बनाती हो”अंकित ने तारीफ की तो अनामिका मुस्कुरा भर दी..बातें करते करते शाम हो गयी ..अंकित ने अनामिका की चिंता करते हुए रुकना चाहा… तो अनामिका ने उसे मना कर दिया और वो अपने घर की ओर चल दिया……… अभी बस्स सड़क पर आ ही पाया था कि थोड़ी दूर से ही उसे रुचिता की गाड़ी दिखी …रुचिता ने उसे देखा तो गाड़ी उसी ओर मोड़ दी …साथ मे नीरू भी थी …जो उसे देख गाड़ी से नीचे उतर, उसके पास आ गयी थी …बोली “रुचिका ने बताया आपको चोट लगी है …कैसे हो अब “? “बस्स जरा सी चोट लगी है…ठीक हूँ.. आप लोग तो बेकार में परेशान हैं मेरे लिए” “आप यहाँ? वो भी.इस रोड पर …क्या कर रहे हैं” रुचिका ने गाड़ी में बैठे बैठे ही पूछा “क्यों इस रोड पर क्या प्रॉब्लम है “अंकित ने पूछा “अरे …आपको नहीं पता “ “क्या…”? “इस रोड के अंदर …” @@@ एक बड़ी तेज़ “पी पी “ की आवाज ने कान और सिर को भेंद दिया …वो फिर भी अपनी आवाज को तेज करके बोल रही थी ..लेकिन अंकित को कुछ सुनाई नही दे रहा था…उसने अपने दोनों हाथ कान पर रखे और डमरू की तरह उन्हें रुचिका के सामने ये जताते हुए हिला दिया कि उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा…”पी पी “करती हॉर्न की आवाज और नजदीक आ गयी थी… तीनो ने एक साथ अपने कानों पर हाथ रखकर रोड की तरफ देखा तो इससे पहले कोई कुछ समझ पाता..उस ट्रक ने पूरी स्पीड से रुचिका की कार में टक्कर दे मारी …एक जोरदार ` धड़ाक` की आवाज के साथ रुचिका की गाड़ी हवा में उछल गयी और हवा में ही पलटते हुए दूर सड़क पर जा गिरी.. . “रु…….चि…….का ” चीखती हुई नीरू रुचिका की कार की ओर भागी …और अंकित उस ट्रक की ओर ..कि नीरू ने अंकित को बुलाने के लिए जोर से चीखते हुए उसे आवाज दी “अंकि…त …जल्दी …जल्दी ” और अंकित रुचिका की कार की तरफ पूरी ताकत से दौड़ गया… Part-11

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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट -9

पार्ट – 9 by Sonal Johari Summery सुबह जिम से लौटने के बाद अंकित ऑफिस के लिए तैयार हो हुआ और निकल गया…लेकिन मन में उथल पुथल मची हुई थी ना सही कल लेकिन राव सर को पता लग ही जायेगा और वो मुझे ऑफिस से निकाल देंगे…चाहे लाख अच्छे हो वो लेकिन पक्ष तो उसी मस्कुलर का लेंगे Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt आज अनामिका के घर का दरवाजा खुला दिखा तो सीधे ही अंदर चला गया और नजर ऊपर गयी तो हल्की चीख निकल गयी उसके मुंह से …झूमर पर अनामिका उल्टी लटकी थी …उसकी चीख सुनी तो नीचे उतर आई .. “क्या हुआ …चीखे क्यों “? “तुम.. तुम …ऊपर लटकी हुई थी “ “तो…? इसने चीखने जैसा क्या है…जिम्नास्टिक के लिए कौन सी बड़ी बात है ये, बल्कि यहाँ से तो शुरुआत करते हैं हम ” उसने चिढ़ते हुए कहा “तुम जिम्नास्टिक भी करती हो “उसने हँसते हुए पूछा “अभी तुमने जाना ही क्या है ” उसने अंकित के चेहरे पर नजर टिका मुस्कुराते हुए कहा “हम्म…बहुत अच्छे” अंकित ने उसका उत्साहवर्धन करने को ताली बजाते हुए कहा “तुम बैठो …अभी आयी ” बोलते हुए वो अंदर चली गयी ..और जल्दी ही एक ट्रे में कॉफ़ी संग पिज़्ज़ा ले कर लौटी ट्रे देखते ही अंकित बोला ..”मैं पिज़्ज़ा नहीं खाऊंगा… एक तो खाता नहीं ऊपर से ..रुचिका का मन रखने को खाना पड़ा आज ऑफिस में” “रुचिका “? “हाँ …राखी की जगह आयी है…काफी तेज़ और खूबसूरत है..और हां थोड़ी सी फ़्लर्ट भी तुम्हारी तरह ” और जोर से हँस दिया अंकित का मन :तू जला रहा है उसे अंकित: मैंने सुना था..जलन, बहुत खूबसूरत फीलिंग है लेकिन तब ही, जब इसे आप अपनी आंखों से देख सको अंकित का मन : और पॉजिटिव भी हो अंकित “हाँ …तो मैं कौन सा नेगेटिव कर रहा हूँ अंकित का मन ” देख …बुरा लग रहा है उसे शायद उसे” अंकित “ऐसा? …अरे यार अंकित:- …हे अनामिका …क्या हुआ” “सोच रही थी “ “क्या” “तुम्हारे प्यार में शिद्दत तो है ना”? “शिद्द्त ? तुम्हारे लिए अपनी जान भी दे दूंगा .”अंकित ने गंभीर होते हुए कहा “पता है ना …जो कह रहे हो “? “अच्छी तरह से …जब चाहे आजमा लेना…तुम कहो तो अभी दे दूं अपनी जान “ “नहीं… नहीं “ “अब चलूं” उसने जाने को पूंछा “हम्म ” हाँ में सिर हिलाते हुए “क्या हम्म….गले कौन लगेगा “? अंकित अपनी बाहें फैलाते हुए बोला तो अनामिका उसके गले लग गयी *** सुबह जिम से लौटने के बाद अंकित ऑफिस के लिए तैयार हो हुआ और निकल गया…लेकिन मन में उथल पुथल मची हुई थी ना सही कल लेकिन राव सर को पता लग ही जायेगा और वो मुझे ऑफिस से निकाल देंगे…चाहे लाख अच्छे हो वो लेकिन पक्ष तो उसी मस्कुलर का लेंगे .. क्या पता कौन है ..लगता तो उनका बेटा है ,मुझे जल्दी ही कोई इंतजाम करना होगा अपनी जॉब का, ‘आहह ‘! विचारों में उलझे अंकित को सामने पड़ा पत्थर नहीं दिखा और मुंह के बल गिर पड़ा …और दर्द से कराह उठा…एक ,दो बार उठने की कोशिश की पर नहीं उठ पाया…कि किसी ने उसकी मदद के लिए अपना हाथ बढ़ा दिया नजर उठाकर देखा तो रुचिका मुस्कुराती हुई सामने खड़ी थी.. “आप ..” “जी हां मैं… लाइये हाथ दीजिये…दीजिये” अंकित ने उसकी ओर अपना हाथ बढ़ा दिया और रुचिका ने अपनी ताकत लगाते हुए अंकित को उठने में मदद की..और पूछा “आप ठीक तो हैं”? “अहह… हाँ ..ठीक हूँ “अंकित ने अपने कपड़े झाड़ते हुए कहा “मुझे तो नहीं लगता…आपके घुटने से खून बह रहा है..देखिये” रुचिका ने अंकित के घुटने की ओर इशारा करते हुए कहा “अररे हाँ… लेकिन बहुत नहीं है.. कोई चिंता की बात नहीं” उसने अपने घुटने पर हाथ रखते हुए कहा “मुझे लगता है आपको डिस्पेंसरी चलना चाहिये.. चलिये गाड़ी में बैठिए” रुचिका ने आगे बढ़कर अपनी कार का दरवाजा खोल दिया और अंकित को बैठने का इशारा किया “आप ऑफिस जाइये..मेरी वजह से आप भी लेट हो जाएंगी” “आप मेरी जगह होते तो, मुझे ऐसे हाल में छोड़ कर चले जाते”? वो ड्राइविंग सीट पर बैठ गयी अंकित ने मन मे कहा ..हरगिज नहीं ..इंसानियत भी कोई चीज है “मुझे लगता है आपको ,..आपका जवाब मिल गया होगा ,बैठिये जल्दी से और अंकित बगल वाली सीट पर बैठ गया..जैसे ही उसने सीट बेल्ट बांधी रुचिका ने गाड़ी डिस्पेंसरी की ओर मोड़ दी…डिस्पेंसरी पहुंचे अंकित को डॉ ने एक इंजेक्शन लगाया और चोट पर मरहमपट्टी कर दी। “आप ना होती तो जाने कब तक वही पड़ा रहता मैं”अंकित ने रुचिका को बोला “ऐसा भी कुछ नहीं कर दिया मैंने… खैर ये बताइये घर जाएंगे या ऑफिस ? रुचिका  बोली “घर का तो कोई मतलब नहीं.. ऑफिस ही चलते हैं” अंकित ने उठते हुए कहा और कार की तरफ मुड़ गया..पीछे पीछे रुचिका भी मुड़ गयी और बोली “मैं आपसे रिक्वेस्ट करूँगी कि आप आज आराम करें… आराम करेंगे तो जल्दी ठीक हो जाएंगे “ “रुचिका जी,मेरा ऑफिस जाना बहुत जरूरी है …कल कुछ इम्पोर्टेन्ट मीटिंग्स हैं.. जिनकी तैयारी करनी है” “इसीलिए तो कह रही हूँ, आज आराम कीजिये ताकि कल आराम से मीटिंग कर लें… बाकी आपकी मर्जी ” रुचिका ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा और अंकित को बैठ जाने का इशारा किया..अंकित को रुचिका की बात ठीक लगी,क्यों ना आज का दिन अनामिका के साथ बिताया जाए ..हम्म ये ठीक रहेगा… आज ऑफिस में कोई ऐसा काम भी नहीं जो उसके ना जाने से रह जाये … “मुझे लगता है आप ठीक कह रही हैं…प्लीज़ राव सर को बता देना आप कि… “आप फिक्र मत कीजिये मैं उन्हें जरूर बता दूंगी…आप बैठिये मैं आपको घर तक छोड़ देती हूँ” “नहीं …उसकी जरूरत नहीं, एक दोस्त  रहता है यहीं उसी को बुला लूंगा ,आप जाइये” उसने रुचिका को भेजने के लिए झूठ बोल दिया “अच्छा …ठीक है ” बोलकर उसने गाड़ी बढ़ा ही पायी थी कि अंकित ने उसे हाथ का इशारा दे रोक दिया… “रुचिका जी…माफी चाहूंगा…मैंने कभी आपसे ठीक से बात तक नहीं की… वो असल मे राखी की जगह किसी को देखना अच्छा नहीं लग रहा था,लेकिन उसमें किसी का

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क्या अनामिका बापस आएगी – पार्ट -8

पार्ट -8 by Sonal Johari Details Summery ‘कहाँ चली गयी अभी तो यही देखा था मैंने उसे …शायद अनामिका का प्यार मेरे सिर चढ़कर बोल रहा है …इसलिये हर जगह वो ही दिख रही है , उसने खुद को सिर के पीछे एक हल्की सी चपत लगाई और मुस्कुराते हुए अंदर आ गया… Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt “राव सर्… यहाँ ” उसका मुंह खुला का खुला रह गया,उसने अपना हाथ माथे पर रखा ..और ये सोच कर कि कहीं धोका ना हो गया हो देखने में,फिर से देखा तो राव सर ही थे..वो उस मस्कुलर को कह रहे थे,”आज भी शराब पीकर आये हो …कैसे समझाऊँ तुम्हें” .फिर से अनगिनत प्रश्न मन मे आने लगे अंकित के,…राब सर यहाँ कैसे ? इससे सर का क्या कनेक्शन ,राव सर इसके साथ पहले कभी क्यों नही दिखे… या ये कभी ऑफिस में दिख सकता था …इतने दिनों में सर ने अपने परिवार का कोई जिक्र कभी नहीं किया…इन्ही सब प्रश्नों में डूबता उतराता अंकित घर पहुंचा दरवाजा खोलते ही सरोज बड़ी खुशी से बोली .. “अंकित देख तो जरा…”इतना बोलकर उन्होंने किचन की ओर इशारा किया…घनश्याम… उसे देख किचन से बाहर निकल आये थे…हाथ मे सब्जी से सना हुआ चमचा पकड़कर …और बोले “अंकित…जल्दी हाथ ..मुंह धोकर तैयार हो जाओ..मलाई कोफ्ते बनाये हैं आज स्पेशली तुम्हारे लिए..”बड़े खुश दिख रहे थे,.. पहली बार अंकित ने..घनश्याम को खुद,से इतने प्यार से बात करते देखा तो, एक बार को तो उसे ,यकीन नहीं हुआ..लेकिन बहुत अच्छा लगा.. “अच्छा…बस्स पांच मिनट में आया ” इतना ही बोल वो अपने कमरे के लिए सीढिया चढ़ गया… खाना खाने के बाद जब वो सोने गया तो उसके मन मे आया कि अब राव सर को पता लग जायेगा कि उसने मस्कुलर के साथ मारपीट की है तो कल का दिन उस ऑफिस में अंतिम दिन होगा… या ऐसा भी हो सकता है कि बेहद नशे की हालत में था मस्कुलर ,तो शायद उसे ना पहचान पाए… जो होगा वो देख लेगा , यही सब ..सोचते सोचते अंकित…सो गया… *** अंकित पूरी तरह से खुद को तैयार कर चुका था कि ये उसका ऑफिस में अंतिम दिन है …बचे काम निपटा देने चाहिए..ये सोचकर काम करने में जुट गया ऑफिस में कहीं भी एक्सटेंशन पर फ़ोन आता तो वो चौकन्ना हो जाता ..कि राव सर का फ़ोन तो नहीं आया..वो अभी उसे बुलवाकर बोलेंगे कि ऑफिस से निकल जाओ…ठीक है निकल जाऊँगा… लेकिन अनामिका को कोई भी तकलीफ दे,ये नहीं सहूँगा…बोल दूँगा ये ना सिर्फ उसकी फोटो लिए घूमता है बल्कि घर के बाहर जाकर उसके फ़ोटो खींचता है… इसी सोच में उलझा था कि इतने में नीरू सामने खड़े दिखी .. .”अंकित,आपको राव सर बुला रहे हैं…और आपका एक्स्टेंशन फोन काम क्यों नही कर रहा..कितनी बार ट्राई किया” नीरू को अपनी सीट छोड़कर यूँ चलकर अंकित को बुलाने आना अच्छा नहीं लगा..अंकित ने देखा तो सच में रिसीवर अलग पड़ा था.. “ठीक है जा रहा हूँ…सॉरी.. तुम्हे यहाँ तक आना पड़ा ” अंकित चाहता था वो जल्द से जल्द सामने से चली जाए ..ताकि वो सीधे अपना बैग उठाकर राव सर के पास जाए …और जब वो निकल जाने को बोलें तो सीधे वहीं से निकल जाए… “अररे कोई बात नहीं” नीरू ने झूठी मुस्कान के साथ कहा,और चली गयी..अंकित ने भी बैग उठाया और राव सर के सामने पहुंच गया. “गुड़ मॉर्निंग सर्… अंकित ने बड़े रूखे मन से कहा “गुड़ मॉर्निंग …अंकित ये बताओ …क्या राखी ने तुम्हारी कोई मदद की “? कुछ लिखते हुए ,बिना उसकी ओर देखे बोले वो “बिल्कुल की सर..बहुत की” “हम्म…तो तुम्हे नहीं लगता …तुम्हे रुचिका की मदद करनी चाहिए..वो यहाँ अभी अभी आयी है. ऑफिस के सारे मेम्बर्स को आपस मे एक परिवार की तरह मिलजुल कर रहना चाहिए…” “मैं समझ गया सर” “हम्म…कोई मीटिंग है क्या अभी …” “जी…सर …मेहता सर आने वाले होंगे… “ठीक है …तुम साथ रहना “ “जी सर “…अंकित ने राहत की सांस ली…वो जैसा सोच रहा था वैसा बिल्कुल नहीं हुआ वो केविन से बाहर आया तो रुचिका अपनी सीट पर नीरू के साथ पिज़्ज़ा खाते दिखी… वो सीधे डेस्क तक ही पहुंच गया मुस्कुराया तो रुचिका ने उसकी ओर पिज़्ज़ा बढा दिया “सॉरी …मैं पिज़्ज़ा नहीं खाता” उसने बड़ी नर्मता से कहा “थोड़ा सा तो लीजिये प्लीज़” रुचिका ने आग्रह किया तो उसने एक छोटा सा टुकड़ा उठा लिया “कैसा लग रहा है आपको यहाँ इस ऑफिस में ” उसने यूँ ही पूछ लिया ‘सब अच्छे हैं…अच्छा लग रहा हैं… बस्स आप को छोड़कर” उसने हँसते हुए कहा तो अंकित बोला “हम्म…मैं खड़ूस जो हूँ “दोनों हँसने लगे इतने में अंकित को ऑफिस के ठीक बाहर अनामिका दिखीं तेज़ी से बाहर निकला वो,आकर देखा…नहीं दिखी ..थोड़ी दूर चलकर भी देखा…लेकिन नहीं दिखी …उसने खुद से कहा ‘कहाँ चली गयी अभी तो यही देखा था मैंने उसे …शायद अनामिका का प्यार मेरे सिर चढ़कर बोल रहा है …इसलिये हर जगह वो ही दिख रही है , उसने खुद को सिर के पीछे एक हल्की सी चपत लगाई और मुस्कुराते हुए अंदर आ गया… Part-9

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क्या अनामिका बापस आएगी? पार्ट – 7

पार्ट – 7 by Sonal Johari Summery अनामिका….बहुत…बहुत …अगर तुम स्वीकार कर लो तो इस धरती पर मुझसे ज्यादा कोई खुसनसीब नही होगा” अंकित अनामिका की ओर अपने जवाव की उम्मीद मे देखना लगा Language: Hindi buy on amazon Read Excerpt “अ ….अ अनामिका… वो अ” अंकित बहुत कोशिश के बाबजूद भी कह नहीं पा रहा था “क्या… कहिए ना “ अनामिका ने मुस्कुराते हुए पूछा तो जैसे हिम्मत मिली और वो बोल गया कि “जी… मैंने एक व्हाइट ड्रेस खरीदी है…काफी दिन हुए ” “ड्रेस… क्या मेरे लिए “ उसने पास आते हुए पूछा “जी…ब्स्स यूं ही .. दिखी … अच्छी लगी… तो ले ली “ वो जल्दी से बोल गया “अच्छा…तो दी क्यो नहीं..अभी कहाँ है”? अंकित की अपेक्षा के बिलकुल बिपरीत उसने मुस्कुराते हुए पूछा “मेरे कमरे पर “ अंकित ने जवाव दिया… और मन ही मन अफसोस किया कि पहले ही ये बताने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पाया “तो देर किस बात की…जाइए ले आइये “ वो अब भी मुस्कुरा रही थी “अभी…?” जैसे मानो सुनने के बाद भी यकीन ना हो रहा हो अंकित को “जी….बिल्कुल अभी… जल्दी ले आइये.. डिनर पर नही चलना ? “कहकर वो अंदर जाने को मुड गयी “ब्स्स अभी लाया “ कहता हुआ अंकित अपने घर की ओर दौड़ गया,उसे लगा जैसे वो मानो हवा मे तैर रहा हो..कुछ ही पल मे घर पहुँच गया…दरवाजा खुला था घर का, यूँ तूफानी गति से दौड़ते हुए घर मे घुसा, कि सरोज कुछ बोल पाती इससे पहले…अंकित अपने कमरे मे पहुंच गया…कबर्ड मे से ड्रेस को निकाला ..बड़े प्यार से उसे छुआ..और एक बैग मे रख.. दौड़ते हुए नीचे दरवाजे तक पहुंचा गया “क्या हुआ….. अंकित…. सब ठीक तो है “ हाथ मे जल का लोटा उठाए वो पूजा घर से उठ कर बाहर आ गयी थी …उसे देख … “हाँ हाँ …माँ सब ठीक है …. ब्स्स जल्दी मे हूँ “ भागते हुए उसने जवाव दिया …और दौड़ गया अनामिका के घर की ओर जैसे ही अंकित पहुंचा… अनामिका ने ड्रेस लेने के लिए अपना हाथ बढ़ा दिया और अंकित ने उसके हाथ मे पैकेट थमा दिया… वो वोली “ब्स्स दो मिनट” और अंदर चली गयी… और अंकित अपने हाथ आपस मे मलते हुए चहलकदमी करने लगा … मन ही मन ये दुआ करते हुए कि उसकी लायी हुई ड्रेस अनामिका को पसंद आ जाए और फिट भी …दो मिनट भी ना हुए होंगे कि वो सामने आ गयी..और अंकित के मन मे आया :कहीं ऐसा तो नही ड्रेस फिट ना आई हो और अगले ही सेकंड नजरों ने देख लिया ..उसकी लायी हुई वही ड्रेस पहनी थी अनामिका … बहुत खूबसूरत लग रही थी अंकित ने अपने मन में कहा …मैंने सोचा भी नही था….. कि ये ड्रेस इतना जचेंगी इस पर…अभी वो अपलक निहार ही रहा था, कि अनामिका ने… पास आते हुए कहा “ अंकित … ये ड्रेस बहुत सुंदर है…मुझे बहुत पसंद आई… बहुत अच्छी पसंद है आपकी“ और इतना बोलते हुए अपना हाथ अंकित की ओर बढ़ा दिया… अंकित ने अपना हाथ थोड़ा आगे बढ़ाया और रुक कर इशारे से पूछा {क्या अपना हाथ तुम्हारे हाथ पर रख दूँ ?} वो मुस्कुराई और पलक झपका कर “हाँ“ मे गर्दन हिलाई…. अंकित ने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया..जैसे मानो एक तूफान ने हिलोर मारा हो. अंकित के अंदर,..और वो ऊपर की तरफ जाने वाली सीढ़ियों पर, कदम रखती हुई बढ़ने लगी . उसके कदमों से ताल मिलाता अंकित ,उसके पीछे- पीछे…जल्दी ही वो दोनों एक खूबसूरत टैरेस पर थे… हल्की ठंडी हवा चल रही थी ..सुंदर सी चाँदनी पूरी टैरेस पर बिखरी हूई थी..एक मेज पर डिनर तैयार था..और कैंडल जो एक खूबसूरत जालीनुमा डिजाइन वाले कवर से ढकी थी..उसके भीतर से छन छन कर आ रही रोशनी एक अलग ही खूबसूरती बिखेर रही थी..बादल उसे, इतने खूबसूरत… सो भी रात मे कभी नही दिखे… और ना ही चाँद इतना खूबसूरत…जैसे चाँद की रोशनी उन बादलों से होकर सीधे अनामिका पर पड़ रही हो और उसे इतना खूबसूरत दिखा रही हो… एक अच्छे मेजबान की तरह अनामिका ने आगे बढ़कर ,कुर्सी को …थोड़ा खिसका कर ऐसे ठीक किया मानो पहले गलत तरीके से रखी हो और अंकित से बैठ जाने को कहा, “मैं आपको डिनर कराने बाहर ले जाने वाला था ना…हम बाहर जा रहे थे ना”? उसने बैठते हुए कहा “हम कहीं भी जाते… बाहर बहुत लोग होते…मुझे भीड़ -भाड़ बिल्कुल पसंद नहीं….मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है….क्या ये सब आपको अच्छा नही लगा ? वो भी बिना कोई बाहरी आड्म्बर “ “बेहद …बेहद…इतना खूबसूरत नजारा मैंने अपने जीवन मे ना कभी देखा.. ना महसूस किया …अनामिका जी ……आपकी मेहनत जो आपने इस डिनर के लिए की है,जगह की पसंद और ये शाम .. वाह … मेरे पास तारीफ के लिए शब्द नही “ अंकित ने खुशी से भरकर ..आसमान की ओर दोनों हाथ फैलाते हुए ज़बाव दिया “जी… नही…. सिर्फ अनामिका कहिए “ उसने अंकित की ओर खाने की प्लेट बढ़ाते हुए कहा “अ ….ना…मि… का ” उसने शर्माते हुए कहा और प्लेट पकड़ कर अपने सामने रख ली अंकित का मन “अब कब?? इससे बेहतर मौका कब मिलेगा…बता दे अपने मन की बात…हम्म अंकित:- मैं कुछ कहना चाहता हूँ … अनामिका:-“हम्म कहिए ना” उसने खाने का निवाला मुँह मे रखते हुए कहा अंकित:- “ आप बहुत खूबसूरत हैं ,…जाने कब से… मुझे खुद एहसास नही हुआ, कि मैं कब ,तुमसे इतनी मोहब्बत करने लगा,मैं तुम्हें चाहता हूँ…और जीवन के अंतिम झण तक तुम्हें चाहूँगा….” कहते हुए अंकित अपनी कुर्सी से उठ कर कर नीचे अपने घुटनों पर बैठ गया “मैं तुमसे प्यार करता हूँ ,अनामिका….बहुत…बहुत …अगर तुम स्वीकार कर लो तो इस धरती पर मुझसे ज्यादा कोई खुसनसीब नही होगा” अंकित अनामिका की ओर अपने जवाव की उम्मीद मे देखना लगा,और अनामिका जो खड़ी- खड़ी उसकी ओर ही देख रही थी ..धीमे कदमों से चलते हुए बढ़ीऔर. पास आकर अपने दोनों हाथ उसकी ओर बढ़ाते हुए बोली “ना प्यार करती होती … तो डिनर ऐसे टैरेस पर रखती ?..मैं भी बहुत चाहती हूँ तुम्हें” उसने मुसकुराते हुए कहा तो अंकित एक बच्चे की तरह खुश होकर बोला “सच” … “हाँ….बिल्कुल

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