Horror Stories

वैदही गायब है! VAIDEHI GAYAB HAI- पार्ट 6

“हम्म…वो तुम पर चौतरफा हमला करने वाली है,पारिवारिक रूप से कर ही रही है,जल्दी ही आर्थिक और भावात्मक चोट भी करने वाली है..साहिल ..तुम्हारी लड़ाई सामान्य दुश्मन से नहीं बल्कि एक बुरी आत्मा से है..खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लो” प्रेमलता को रोता देख साहिल जैसे ही उनकी ओर बढ़ता है, गुरुजी उसे दूर ही बने रहने का इशारा करते हैं और खुद आगे बढ़ कर पूछते हैं “बोलो माई..फिर क्या हुआ” प्रेमलता :-“फिर हमें दो दिन बाद ही पता लगा कि वैदही ने खुद को आग लगा कर आत्महत्या कर ली थी… साहिल :-“(चौंकते हुआ) “क्या …”प्रेमलता :-(हामी में सिर हिलाती हुई)”हम्म…मेरे पति और मैंने ये बात साहिल को ना बताने का निर्णय लिया ..हम डर गए थे,कि कहीं साहिल खुद को किसी भी प्रकार से दोषी मानकर सामान्य जिंदगी ना जी पाए …गुरु जी :- “हम्म प्रेमलता:-“जब ये खबर सत्यजीत भाई साहब ने हमें बताई ,तब हमने उनसे यही अनुरोध किया कि वो ये बात साहिल को ना बातये,और वो मान भी गए..और पहले की ही तरह मेरे पति के बिज़नेस में उनका साथ देते रहे आज भी साथ काम कर रहें हैं ..बड़े भले आदमी हैं” गुरुजी:-(शून्य में ताकते हुए बहुत धीरे से) “भला दिखना और भला होना… दोंनो में बड़ा फर्क है…(फिर सामान्य आवाज में) साहिल क्या घर में लहसुन है? जल्दी लाओ?” साहिल ने प्रेमलता की ओर देखा,इस आशय से कि क्या लहसुन है? तो उन्होंने हामी में सिर हिला दिया,साहिल अंदर गया और लहसुन ले आया…गुरुजी के बूढ़े हाथ तेज़ी से चलने लगे और सब चुपचाप उन्हें देखनें लगे..थोड़ी देर बाद ही उन्होंने लहसुन की कलियों से बनी एक माला साहिल के गले में पहना दी और दूसरी प्रेमलता को देते हुए  बोले,”इसे पहन लो माई”साथ ही दो काले धागे की मालायें उन्होंने अपनी झोली में से निकाल कर क्रमशः जितेंद्र और अखिल को दे दी,और बोले:- “वैदही … उसे जगाया गया है बदला लेने के लिए” साहिल :-(चौंकते हुए) “बदला ..किससे” गुरु जी:-“तुमसे ..” साहिल :-“(हैरत से) मुझसे”? गुरुजी :-“हम्म…वो तुम पर चौतरफा हमला करने वाली है,पारिवारिक रूप से कर ही रही है,जल्दी ही आर्थिक और भावात्मक चोट भी करने वाली है..साहिल ..तुम्हारी लड़ाई सामान्य दुश्मन से नहीं बल्कि एक बुरी आत्मा से है..खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लो” साहिल:-(अवाक सा) आखिर किस बात का बदला..मैंने ऐसा क्या किया है”? गुरुजी:-“तुम दोषमुक्त हो बेटा, लेकिन वो तुम्हें विवाह से मना करने के कारण दोषी मानती है” साहिल :-(रोते हुए)”ओह्ह आत्मा बनकर और  मेरे पापा.. वो ठीक तो हैं गुरुजी “? गुरुजी:-“यूँ रोना बिलखना बन्द करो,ये लड़ाई तुम्हारी है.. लड़नी ही होगी,अन्य कोई उपाय नहीं,अपने पिता के बारें में भी जल्द ही जान लोगे…(आसमान की ओर देखकर) आज की रात बहुत भयानक है..विधिवत पूजा करनी होगी,हमें जाना होगा” “आप हमें अकेला छोड़कर नहीं जा सकते गुरुजी”सब एक साथ घबराते हुए बोले “हमें रातभर यज्ञ करना होगा..जब तक ये अभिमंत्रित मालायें तुम लोगों के गले में हैं,वो किसी को मार नहीं पाएगी,याद रहे किसी भी हालत में गले से ये मालायें ना निकलने पायें …बस्स”  ये बोल कर गुरुजी वहाँ से चले गए.साहिल ने गोविंद को भी उसके घर भेज दिया,और प्रेमलता को बिस्तर पर लिटाकर सब उनके आस-पास बैठ गए… थोड़ी देर बाद,  अंकित उठा और सड़क पर चलने लगा,कि उसने सुना कोई धीरे धीरे उसका नाम ले रहा है ..वो पीछे पलटा देखा तो मीनाक्षी थी,मुस्कुराती हुई उसकी ओर देख रही थी वो खुश होकर उसके पास गया और  बोला ” तुम्हें कुछ बताना चाहता हूँ” “हम्म बोलो ना”वो अपना हाथ उसकी ओर बढ़ाते हुए बोली “यही ..कि मैं तुम्हें बहुत पसंद करने लगा हूँ” बोलते हुए उसने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया,एक शर्द वर्फ सी सरसरी जैसे साहिल की नसों में दौड़ गयी हो,उसने घबराकर अपना हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन पकड़ इतनी मजबूत थी कि हाथ हिलाना तक मुश्किल हो गया,उसने मीनाक्षी की ओर देखा. आधा जला हुआ चेहरा जो बहुत भयानक दिख रहा था,और बाकी का आधा चेहरा बालों से ढंका हुआ  ‘आ..ह’ डर से उसके मुँह से चीख निकल गयी.. “क्या हुआ साहिल” जितेंद्र ने उसे हिलाते हुए पूछा,साहिल ने डर से सहमें जितेंद्र को देखा,और आस पास नजर दौड़ाई फिर धीरे से सहम कर बोला”ओह्ह…इतना भयानक सपना” ‘घर्रर ‘की आवाज के साथ साहिल का फोन पर ‘मीनाक्षी की माँ”‘ लिखा हुआ फ्लैश हुआ,उसने फ़ोन उठाया,उधर से मीनाक्षी की माँ रोते हुए बोलीं “साहिल,मेरी बेटी कहाँ है”? साहिल-(चौंकते हुए)”क्या मीनाक्षी घर नहीं पहुँची अब तक “?“नहीं..मेरी मदद करो बेटा,जल्दी आ जाओ मुझे बड़ी घबराहट हो रही है” और साहिल का जवाब सुने बिना ही उन्होंने फोन रख दिया ..अवाक से साहिल को देखकर अखिल ने आशंकित होते हुए पूछा “क्या हुआ”? “मीनाक्षी अब तक घर नहीं पहुंची है,आँटी का फोन था,मुझे जाना होगा” उसने उठते हुए कहा और तेज़ी से ये बोलते हुए निकल गया कि “मम्मी का ख्याल रखना” मीनाक्षी के घर जाकर साहिल ने दरवाजे पर दस्तक दी,दरवाजा खुला तो वो चौंक गया…”मीनाक्षी ” उसके मुँह से निकल गया और वो हतप्रथ सा उसे देखते हुए बोला “तुम …कब आयी “? “ऐसे क्यों पूछ रहे हो ..मैं तो हॉस्पिटल से सीधे घर ही आयी थी”साहिल:-“(चौकते हुए) क्या ..लेकिन तुम्हारी ..?” मीना…क्षी..”बीच में ही मीनाक्षी की माँ उसे पुकारते हुए वहाँ आयी,और बोली  “जल्दी से मेरे साहिल के लिए कुछ खाने को ला “अपनी माँ के ऐसे बोलने से मीनाक्षी को थोड़ा अजीब लगा और वो कंधे उचकाते हुए किचिन की ओर चली गयी, “माँ ssss….”एक तेज़ चीख किचिन की ओर से आई तो साहिल उसी ओर भागा, किचन में जो देखा उसे देखकर वो डर गया ,मीनाक्षी की माँ फर्श पर मृत पड़ी थी…वो तेज़ी से पलटा और बाहर कमरे की ओर भागा,वहाँ अब कोई नहीं था… वो खुद से बोला “वै..द..ही” फिर किचन में जाकर उसने मीनाक्षी का हाथ पकड़ा और बोला “जल्दी चलो यहाँ से मीनाक्षी” “(रोते हुए) मेरी माँ नहीं रही साहिल…” “…जल्दी चलो मीनाक्षी …प्लीज़ चलो “वो उसका हाथ खींचते हुए घबराकर बोला “मैं कहीं नहीं जाऊँगी..अपनी माँ को छोड़कर”उसने रोते हुए जवाब दिया कुछ ना समंझ पाने की स्थिति में वो बापस कमरे में आ गया, कि उसे लगा किसी ने पीछे की ओर

Horror Stories

वैदही गायब है! VAIDEHI GAYAB HAI- पार्ट 5

“वो किसी को नहीं छोड़ेगी..लौट जाओ” बिल्कुल पास आकर वो जोर से बोला तो तीनों डर कर पीछे हो गए“कौन ..कौन नहीं छोड़ेंगी..” साहिल ने डरते हुए पूछा“वही ..जिसने मुझे 2 दिन पहले मार दिया है…”“क्या ” डर से तीनों एक स्वर में चीखे,तो वो बूढ़ा अजीब सी हँसी हँसा …और पलक झपकते वहाँ से जैसे गायब हो गया.. साहिल उन्हें जबर्दस्ती पानी पिलाता है और कहता है”मुझे समंझ नहीं आ रहा है आखिर पापा के होने का एहसास आपको अकेले होने पर ही क्यों होता है,ठीक है आज ही जाऊँगा उन्हें लेकर आऊँगा” “साहिल कहाँ है यार “अखिल आवाज देते हुए आता है साथ में जितेंद्र भी है.. साहिल:-“मैं फ़ोन भी करने वाला था तुम दोंनो को,नाहरगेड़ा जा रहा हूँ, और तुम दोंनो साथ चल रहे हो मेरे”दोनों एक साथ चौंकते हुए”नाहरगेड़ा अभी…?क्यों ?” साहिल:-“क्योंकि पापा वहाँ गए हैं,कल तक उन्हें आ जाना चाहिए था, और अभी तक नहीं आये,मम्मी उन्हें बहुत याद कर रहीं हैं उनकी तबियत खराब हो गयी है..” अखिल :-“थोड़ा इंतज़ार और कर ले वक़्त लग जाता है यार,हो सकता है कल तक आ जायें”“नहीं …नहीं.. बहुत हुआ,मैं आज बल्कि अभी जाऊँगा तुम्हें नहीं चलना तो कोई बात नहीं” अखिल:-“कैसी बात कर रहा है यार, चल रहा हूँ”जितेंद्र:-“मैं भी,लेकिन आँटी यहाँ अकेली रहेगी क्या”? साहिल :-“हाँ ये तो सोचा ही नहीं ..(कुछ सोचते हुए) ठीक है मीनाक्षी को बोल देता हूँ वो रुक जाएगी” उसने फोन उठाकर उसे मिलाया और रुकने के लिए बोला तो वो सहज तैयार हो गयी,फिर फ़ोन कर सत्यजीत को शोरूम की जिम्मेदारी दी,और पता पूछ कर तीनों लोग कार में बैठ निकल पड़े नाहरगेड़ा की ओर..लगभग आधे रास्ते पहुंचते -पहुँचते शाम हो गयी “हमें नही लगता हम आगे जा पाएँगे,एक तो इतना उबड़ खाबड़ रास्ता ऊपर से इतनी ठंड, रुकना पड़ेगा” अखिल बोला“हम्म,चलो कुछ खा पी लेते हैं..”साहिल ने बोलने के साथ ही गाड़ी एक बहुत छोटे ढावे पर रोक दी,जिस पर बस्स एक छोटा सा दीपक जैसा डिमडिमा रहा था..एक चारपाई पड़ी थी,और टूटी फूटी टीन की छत,एक ठंडी पड़ी भट्टी और पास ही बूढ़ा बैठा था जो एक फटा हुआ कम्बल ओढ़े हुए था, ठंड से काँप रहा था, अखिल ने उसे देखकर कहा “हुम् …मुझे लगता है उल्टे ,हमें चाय बनाकर इस बुड्ढे को पिलानी पड़ेगी”एक अजीब सी धुन्ध चारों ओर छायी हुई थी,और हाड़ कंपा देने वाली सर्दी से बुरा हाल हो रहा था..दूर दूर तक कोई और नजर नहीं आ रहा था.. “मैं देखता हूँ” बोलकर जितेंद्र आगे बढ़ा और उस बूढ़े आदमी से बोला “बाबा,नाहरगेड़ा यहाँ से कितनी दूर रह जाता है”बूढ़े ने कोई जवाब नहीं दिया,वो वैसे ही काँपता रहा तो साहिल ने आगे बढ़कर कहा “क्या चाय मिल पाएगी बाबा”? बूढ़ा उठा,और खुद से लपेटा हुआ कम्बल उतारकर एक ओर फेंक दिया,एक अजीब सी गंध माहौल में फैल गयी,तीनों एकसाथ पास खड़े होकर उस बुड्ढ़े को देखने लगे,वो अब उनके एकदम पास आ गया था…अजीब तेज़ ठंडक का एहसास हुआ तीनों को,निस्तेज चेहरा और चमकती आँखों से उसने तीनों को देखा,और बोला “लौट जाओ यहीं से..वरना सब मारे जाओगे..सब” अखिल:-“ये कैसी बात कर रहे हो “? “वो किसी को नहीं छोड़ेगी..लौट जाओ” बिल्कुल पास आकर वो जोर से बोला तो तीनों डर कर पीछे हो गए“कौन ..कौन नहीं छोड़ेंगी..” साहिल ने डरते हुए पूछा“वही ..जिसने मुझे 2 दिन पहले मार दिया है…”“क्या ” डर से तीनों एक स्वर में चीखे,तो वो बूढ़ा अजीब सी हँसी हँसा …और पलक झपकते वहाँ से जैसे गायब हो गया..इतनी ठंड में भी तीनों को पसीना आ गया,अखिल भागकर गाड़ी में बैठ गया,और चीखा “जल्दी बैठो ..जल्दी “ दोंनो गाड़ी में जैसे ही बैठे अखिल ने गाड़ी स्टार्ट की और बापस मोड़ ली,तो साहिल बोला “पापा,मैं उन्हें लिए बिना कैसे जा सकता हूँ” जितेंद्र:-“पागल हुआ है क्या…अभी देखा ना तूने”साहिल:-“मुझे डर है ..कहीं पा …पा” वो शून्य में देखते हुए बोला,अब उसकी आँखों में अनजानी आशंका का डर दिख रहा था,अखिल:-“हम तुझे मौत के मुँह में छोड़ कर जायँगे तूने, सोचा भी कैसे .इतने में साहिल का फोन बजा,मीनाक्षी की आवाज थी “साहिल,आँटी जी ने आत्महत्या की कोशिश की है”साहिल:-“(जोर से चीखते हुए) ‘क्या….”मीनाक्षी:-“हम उन्हें हॉस्पिटल ले आये हैं..लेकिन उनकी हालत गंभीर है,जल्दी आओ साहिल …जल्दी” “अखिल ..गाड़ी तेज़ चला..जल्दी घर चल ..मम्मी ने आत्महत्या की कोशिश की है” साहिल चीखाऔर “क्या “कहने के साथ ही अखिल ने गाड़ी पूरी स्पीड में घर की ओर दौड़ा दी… *ज्योति हॉस्पिटल * प्रेमलता होश में आ गयी थी,साहिल उन्हीं के पास, उनका हाथ पकड़कर बैठा था,जैसे ही उन्होंने आँखे खोली,साहिल के चेहरे पर संतुष्टि के भाव आ गए, साहिल:-“मम्मी,क्यों किया आपने ऐसा”?प्रेमलता:-(आश्चर्य से) “कैसा? मैं यहाँ इस हॉस्पिटलमें क्या कर रही हूँ, मैं तो कपड़े सुखा रही थी” साहिल समेत सबकी निगाहें मीनाक्षी की ओर घूम गयीं वो तपाक से बोली “और आपने उन्हीं कपड़ों में से अपनी साड़ी निकाली और उसका फंदा बना कर लटक गई,(सुबकते हुए) अगर उसी वक़्त ना देख पायी होती और गोविंद भैया ना होते तो (रोने लगती है ),क्यों किया आपने ऐसा”? गोविंद:-“सहीय कह रही है मीनाक्षी दीदी… अगर दीदी चीख ना मारी होती तो हम किचिन मा वर्तन ही धुलता रह जाता (कानों पर हाथ रखते हुए) झरगद वाले बाबा की बड़ी कृपा रही माँ जी पर .. अखिल:-“जब तू बाहर आया तो क्या देखा” गोविंद:-“हम देखता हूँ, कि माँ जी लटकी हैं हुई हैं फंदा पर और आंखों में बहुत गुस्सा दिखत रहा वा वखत माँ जी के,और ऊ गुस्से में कोह रहीं थी कि छोड़ दा हमका ..काहे से, के मीनाक्षी दीदी ने उनके पैर पकरे हुए थे..और हमका मदद की खातिर बुलाय रही थी..” साहिल ने सारी बात सुनकर कृतघ्यता व्यक्त करने वाली निगाहों से मीनाक्षी की ओर देखा,तभी अखिल ने जितेंद्र को इशारा किया,और दोनों बाहर निकल गए, साहिल,मीनाक्षी के पास आकर बोला:-“..माँ से बढ़कर क्या हो सकता है,किसी के लिए? मेरी मम्मी की जान बचाकर तुमने मुझे हमेशा के लिये अपने आगे नतमस्तक कर दिया है,.हमेशा के लिए..जो तुमने किया है उसके लिए शब्दों में शुक्रिया कहना तौहीन होगी “ और इतना बोल वो भी बाहर निकल गया,बहुत मानसिक तनाव में था,तो बाहर आकर उसने सिगरेट जलाई और पीने लगा. .”क्यों मन ही मन तड़प रहा

Horror Stories

वैदही गायब है! VAIDEHI GAYAB HAI- पार्ट 4

50 एकड़ में फैला एरिया एक जिसे एक चारदीवारी से घेर दिया गया था..उसके अंदर हजारों लोग अपने-अपने काम मे लगे थे,…  दीवार के अंदर किनारे पूरे पेड़ पौधों से घिरे थे,जहाँ कुछ सन्त गेरुए कपड़े पहने योग करने में व्यस्त थे तो कुछ साध्वी स्त्रियां पूजा और खाने पीने की व्यवस्था में व्यस्त थी.. बडी सी जगह छोड़ने के बाद ठीक बीचों बीच एक गोल स्टेजनुमा जगह थी जहाँ एकसाथ कई हवनकुण्ड जल रहे थे,और कहीँ बस्स साधु तो कहीं कहीं कुछ यजमानों को पूजा कराई जा रही थी …4 से 5 सीढिया चढ़ने के बाद उस स्टेजनुमा जगह पर एक हवनकुण्ड के पास एक लगभग 70 वर्षीय साधु चांदी से चमकते बालों का जुड़ा बनाये कुछ मन्त्रो का उच्चारण कर रहे थे,हवनकुण्ड के दुसरीं तरफ जितेंद्र और अखिल आंख बंद कर हाथ जोड़े साधु के कहे मन्त्रो को दोहरा रहे थे …एकाएक उन्होंने अपनी शान्त और तेज़ से चमकती आंखे खोली और बोले “बच्चों अब अंतिम आहुति खड़े होकर दो…हम जैसे ही मन्त्र पूरा करके इशारा करें,ये शुद्ध गरी का गोला और बची हुई समस्त सामिग्री इस हवन की अग्नि में प्रेम और श्रद्धा से छोड़ देना..ॐ भूर भुंभ स्वाहा तत्स वितरूर……… स्वाहा अखिल और जितेंद्र ने सम्पूर्ण आहुति दे..उन साधु के पैर छुए और अखिल बोला “गुरु जी,मेरे पिता का स्वास्थ्य आपकी कृपा से अब बिल्कुल ठीक है. ईश्वर से एक ही प्रार्थना है की अब जब भी मिलूँ आपसे, तब किसी समस्या के चलते ना मिलना पड़े” गुरु जी :-“(रहस्यमयी मुस्कान के साथ,ऊपर की ओर हाथ उठाते हुए) होनी को कौन टाल सकता है, हरहाल में मित्र की मदद करना तुम्हारा परम् कर्तव्य ही नहीं बल्कि जीवन के मुख्य उद्देश्यों में से एक उद्देश्य भी होना चाहिये..कल्याण भब:” उनकी बात को सुन निखळ और जितेंद्र ने एक दूसरे को आश्चर्य से देखा,इतने में गुरुजी उठे सीढ़ी पर रखी लकड़ी की खड़ाऊ पहन ‘कट कट ‘ की आवाज करते हुए चले गए, अखिल:-“इनकी बात का क्या मतलब था” ?जितेंद्र:-(दार्शनिक अंदाज में)”इनकी बात समझना इतना आसान होता तो हम साधू ना होते?अखिल:-“तुझे साधू बनने में भी इंट्रेस्ट है”?जितेंद्र:-“क्या यार ..चल चलते हैं.”(सीढियां उतरते हुए)अखिल :-“अभी नहीं ..प्रसाद बाँटना है” बोलने के साथ ही वो भागता हुआ बाहर आया गाड़ी की डिग्गी खोली और वहाँ बैठे भिक्षुओं को दोनों मिलकर खाने के पैकेट बांटने लगे ****“साहिल उठे नहीं क्या अभी तक..साहिल दरवाजा खोलो बेटा”प्रेमलता ने साहिल के कमरे का दरवाजा खटखटा हुए बोलाहड़बड़ाते हुए साहिल उठा और दरवाजा खोल दियासाहिल :-“सब ठीक है ना मम्मी”प्रेमलता:-(खुश होते हुए) हाँ हाँ सब ठीक है,ये देख तो जरा (हाथ में लायी हुई दो साड़ियाँ उसे दिखाती हुई) कौन सी दे दूँ मीनाक्षी को,जरा बता दो”साहिल :-“मुझे क्या पता,मैं क्या जानूँ ये सब” प्रेमलता:-“कौन है हम दो के अलावा इस घर में जिससे पूछूँ बता..(भाबुकता दिखाते हुए) जो करू सो मैं ही करूँ अकेले किसी से कोई आसरा नहीं… रहने दे” साहिल :-(प्रेमलता को प्यार से पकड़ते हुए)”मेरी अच्छी मम्मी…(फिर साड़ियों की ओर देखते हुए ) आ ..आ ..हम्म ..मुझे लगता है ये पिंक वाली सही रहेगी ..क्यों” प्रेमलता:-(खुश होते हुए) मुझे भी यही ज्यादा अच्छी लगी…बड़ी प्यारी लड़की है..एक दिन में ही दिल में उतर गई है,बहुत खयाल रखा उसने मेरा,जाने को कह रही है..सोचा साड़ी दे दूँ… ए साहिल उसे रोक नहीं सकते क्या? साहिल :-“मुझसे ज्यादा आप दुनियादारी जानती हो,कैसे रोक सकते हैं …आप चिंता मत करो तैयार होकर मेरे साथ शोरूम चलो …अकेलापन भी नही लगेगा और मुझे आपकी चिंता भी नहीं रहेगी” प्रेमलता:-“(उदासी भरी आवाज में) ठीक है,मैं उसे साड़ी दे आती हूँ, तू भी तैयार हो जा” “उनके जाते ही साहिल बाथरूम में चला गया,बाहर निकल कर शीशे के सामने खड़े होकर तैयार हो रहा था,कि शीशे में उसे मीनाक्षी दिखी, बरामदे मे..प्रेमलता की दी हुई गुलाबी साड़ी में,तौलिया पकड़े हुए सिर को एक ओर झुकाकर बाल पोंछ रही थी..वो उसे देखता रहासा…हि…ल नाश्ता कर लो बेटा” प्रेमलता की आवाज सुनी तो चौंकते हुए साहिल ने अपने बाल ठीक किये और आकर डाइनिंग टेबिल पर  बैठ गया..गोविंद के साथ मीनाक्षी भी प्लेट लगाने लगी… रह रह कर साहिल की नजर मीनाक्षी पर चली जा रही थी..”ये पिंक साड़ी तुम पर काफी फब रही है”प्रेमलता ने मुस्कुराते हुए कहा तो मीनाक्षी बदले में मुस्कुरा भर दी..और साहिल को अपनी मुस्कुराहट को छुपाने में मेहनत करनी पड़ी…” “मैं पहले अपने घर जाकर फिर शोरूम पर आऊँ तो चलेगा ना? मीनाक्षी ने पूछा तो जवाब में साहिल ने हामी में सिर हिला दिया…थोड़ी देर बाद कार  सड़क पर दौड़ रही थी…फिर मीनाक्षी की गली के बाहर ही साहिल ने गाड़ी रोकी और वो प्रेमलता से हाथ जोड़ कार से उतर गयी… ****4 मंजिला इमारत एक सुनसान जगह पर बनी हुई थी..पूरा गहरा  काला आसमान जैसे कभी वहाँ चाँद तारे निकले ही ना हों. जहाँ सांय -सांय करती हवा की आवाज भी जहाँ सुनी जा सके इतना सन्नाटा,बस्स रात को सियारों की कानफोड़ू आवाज गूँजती जिससे दिल दहल जाता,इसी चौथी मंजिल पर बनें एक छोटे से कमरें के बाहर छोटी सी जगह जहाँ दो कदम ही रखे जा सके बस्स इतनी ही बॉलकनी.. जहाँ पूरे दिन में एक बार ‘धपाक’ की आवाज के साथ एक छोटा सा पैकेट गिरता.आज भी गिरा… उसी कमरे में जमीन पर उकड़ूँ बैठे विक्रांत सिंह ने जब पैकेट गिरने की आवाज सुनी तो घुटने में फॅसा अपना सिर ऊपर उठाया जो अब तक निस्तेज हो चुका है..आँखों मे डर समा चुका है..अत्यधिक ठंड की वजह से रात होने का एहसास हो रहा है, बालकनी पर बनी छोटी सी खिड़की की कुंडी को खोलने के लिए उन्हें शरीर की पूरी शक्ति इकठ्ठी करनी पड़ी. हाथ से कुंडी खोलने के लिए जब ताकत लगाई तो हाथ काँप गया..पूरा शरीर 3 दिनों से बिना कुछ खाये पीए सूखे पत्ते सा बज रहा था..फिर कोशिश की और इस बार ज्यादा कोशिश करने से कुंडी खुल गयी..और इस हालात में भी ये छोटी सी सफलता बहुत बड़ी मालूम हुई सो पपड़ियाये होंठो पर मुस्कान आ गयी..खिड़की का एक पट खोले उन्होंने इधर -उधर देखा..और वो पैकेट उठा कर खिड़की फौरन बन्द करके कुंडी लगा ली..पैकेट खोला तो रोज की तरह ही कच्चे मांस के कुछ टुकड़े ही थे.. जिन्हें खाने

Horror Stories

वैदही गायब है! VAIDEHI GAYAB HAI ! पार्ट 3

जबकि लता जी अपने पति को देखने का दावा कर रही थीं, लेकिन साहिल को दिखा सिर्फ एक काला बिल्ला ..क्या जाग गई वैदेही ? कमरे को खोला तो उसमें कोई नहीं, सिवाय एक काले बिल्ले के जो अपनी तेज़ चुभती आँखों से उसे घूर रहा था,साहिल थोड़ा सहम कर पीछे हट गया तभी वो काला बिल्ला वहाँ से भाग गया,साहिल वैसे ही गुस्से में प्रेमलता के पास आकर बोला ” कहाँ है पापा ? कमरें में तो कोई नहीं “ प्रेमलता ने सूनी आँखों से साहिल को देखा, और उसका हाथ पकड़ कर फिर कमरे तक ले गयीं,और बोलीं “यहीं थे,यकीन कर… यहीं थे,मारपीट कर रहे थे मेरे साथ,तुझे देख कर भाग गए होंगें”साहिल:-(झुंझलाते हुए)” पता भी है क्या बोले जा रही हो आप” इस पर प्रेमलता ने कुछ नहीं कहा, बस्स वो अपने हाथ सहलाने लगी, साहिल ने कहना जारी रखा” पापा दो दिन बाद आयेंगे,हुआ क्या है आपको,चलिये आप को डॉ को दिखा दूँ” साहिल,प्रेमलता को एक मनोचिकित्सक डॉ के पास ले गया,जिसने जब साहिल की और प्रेमलता की पूरी बात सुनी ,तो बोला “देखिये साहिल, आपकी माता जी किसी आशंका के चलते डरी हुई हैं,और डिप्रेशन के लक्षण दिख रहे हैं,कुछ दवाएं लिख देता हूँ,सब ठीक हो जाएगा “दवा लेकर जब साहिल और प्रेमलता दोंनो हॉस्पिटल से निकल रहे थे,तो मीनाक्षी दिख गयी,पास आते हुए बोली,”साहिल आप यहाँ (फिर प्रेमलता की ओर देखकर ) ये आपकी माँ हैं”“जी,नींद ना आने की समस्या से परेशान है,इसीलिए डॉ के पास लाया था,आप यहाँ कैसे?” “ऐसे ही पास में ही कुछ काम था” मीनाक्षी ने जवाब दिया “हम्म..(फिर प्रेमलता की ओर देखकर) मम्मी चलिये आपको घर छोड़ देता हूँ फिर शोरूम जाना है” “नहीं …साहिल, नहीं.. मैं अकेले नहीं रहूँगी उस घर में…बिल्कुल नहीं” वो बच्चों बिलखते हुए बोलीं “कैसी बात कर रहीं हैं आप,देखा ना डॉ ने क्या कहा, बस्स चिंता की वजह से आपको ऐसा लग रहा है” “तू कुछ भी बोल मैं अकेली नहीं रहूँगी” “क्या बात है,अगर आपको एतराज़ ना हो तो क्या मैं आपके घर आपकी मम्मी के साथ रुक सकती हूँ” मीनाक्षी ने साहिल की ओर देखते हुए पूछा,साहिल कुछ बोलता इससे पहले प्रेमलता जी बोल उठी “हाँ बेटी,तू चल मेरे साथ” साहिल ने मीनाक्षी की ओर देखा तो उसने हामी में सिर हिला दिया,उन दोनों को कार में बिठा साहिल घर छोड़ते हुए शोरूम चला गया,शाम को लौटकर आया तो दरवाजा मीनाक्षी ने खोला, “तुम अभी घर नहीं गयी अपने? चलो छोड़ आता हूँ” साहिल ने उसे देखते ही आश्चर्य से कहा“आप बेकार परेशान ना हों, मैं आज यहीं रुकूँगी जैसी कि आपकी माँ की भी इच्छा है”“माँ की इच्छा, कैसी हैं वो? और आप यहाँ ..कैसे ..मेरा मतलब आपके घरवाले”? वो अचरज से बोला “आपकी माँ ठीक हैं और सो रही है, चिंता मत कीजिये,मैंने अपने घर बता दिया है,और मेरी माँ को कोई एतराज नहीं है बल्कि वो अपने साथ की औरतों के साथ ज्यादा खुश हैं” वो मुस्कुरा कर बोली उसे मुस्कुराता देख साहिल के चेहरे पर मुस्कान आ गयी,वो अंदर गया और चेंज कर के डाइनिंग टेबिल पर बैठ गया, और गोबिंद (रसोइया) को आवाज लगाई”गोविंद खाना लगाओ”उसने देखा कि मीनाक्षी खाना लगाने लगी“गोविंद कहाँ है,..आप ..आप क्यों लगा रही हैं खाना”?“गोविंद की तबियत ठीक नहीं थी,तो घर चला गया” वो प्लेट में खाना लगाते हुए बोली“(आश्चर्य से) अच्छा.. आप रहने दीजिए मैं अपने आप लगा लूँगा” कहते हुए उसने मीनाक्षी के हाथों से प्लेट लेने लगा,वो बोली,”मैं लगा दूँगी ना” “नहीं मैं लगा लूँगा” और इस प्लेट के पकड़ने और पकड़ाने में साहिल की ऊँगलियाँ मीनाक्षी की उंगलियों को छू गयी..और मीनाक्षी ने प्लेट छोड़ दी साथ ही अचानक हुए इस एहसास को साहिल भी नहीं संभाल पाया,और उसने भी प्लेट से हाथ हटा लिया,नतीजा.. प्लेट टेबिल पर गिरी और उसमें रखा खाना भी फैल गया, साहिल ने नजरें चुरा कर मीनाक्षी की ओर देखा,जो अपना निचला होठ दाँतों से दवाएं अतिरिक्त पलकें झपकाती हुई जड़वत बैठी थी, उसे ऐसे देख साहिल के चेहरे पर मुस्कान तैर गयी और जल्द ही हँसी में तब्दील हो गयी,उसे हँसता देख मीनाक्षी भी हँसने लगी,दोनों की हँसी की आवाज सुन प्रेमलता अपने कमरे से बाहर आई,दोनों को हँसते देख खुश हुई और बापस अंदर चली गयीं..मीनाक्षी ने एक प्लेट उठाई और उसमें खाना लगा कर खाने लगी, साहिल:-“ये क्या आपने अब तक खाना नहीं खाया था मीनाक्षी :-“मुझे अकेले खाना पसंद नहीं, और आँटी जी ने जब खाना खाया उस वक़्त मुझे बिल्कुल भूख नहीं थी ..तो” साहिल:-(अफसोस में आते हुए) “ओह्ह ये तो बड़ी तकलीफ उठानी पड़ गयी आपको मेरी माँ की वजह से” मीनाक्षी :-“बिल्कुल भी नहीं, बल्कि मुझे उनके साथ समय बिताना पसंद आया,आपको पता है वो पूरे समय आपके बारे में ही बात करती रही,(फिर गंभीर होकर) और जब उन्होंने रुकने को बोला ,तो मुझे एक सेकंड को भी नहीं सोचना पड़ा मेरे मन ने फटाफट मंजूरी दे दी” “ये भरोसा ही नहीं इज़्ज़त अफजाई भी है मेरे लिए,थैंक यू मीनाक्षी, मुझ पर इतने भरोसे के लिए ” साहिल ने मुँह में खाने का निवाला रखते हुए कहा “आपने मेरी जान बचाई,मुझे जॉब दी,वो भी बिना मेरी काबलियत जाने भला आपसे ज्यादा भरोसे के लायक कौन हो सकता है मेरे लिए” अपनी बात पूरी कर मीनाक्षी ने पानी का ग्लास उठाया और धीरे से ऐसे घूँट भरा मानों गर्म कॉफ़ी हो,साहिल को लगा जैसे उसके पेट में तितलियाँ सी उड़ रही है, मन किया कि बैठा रहे ,लेकिन अजीब सी इस खुशी की वजह से चेहरे पर रह रह कर मुस्कान सी आये जा रही थी तो फौरन ख्याल आया कि ऐसे उसे देखने से ना जाने मीनाक्षी क्या सोचे इसलिए उठ गया, और मुँह फेरते हुए बोला,”मीनाक्षी,पूरे घर मे तुम्हें जहाँ अच्छा लगे आराम से और बेफिक्री से सो सकती हो,मुझे तो नींद आ रही है तो मैं चला आने कमरे में,गुड नाइट” “मैं आपकी माँ के पास ही सोऊँगी ,गुड नाइट “ साहिल तेज़ कदमों से अपने कमरें में गया,और दरवाजा बंद कर लिया, खुद से बोला ‘कोई अजनबी.. सो भी लड़की भरोसा कर रही है मुझ पर,अगर रात को बाहर निकला तो देखकर कहीं असहज ना हो जाये,(फिर उठकर गेट लॉक कर

Horror Stories

वैदही गायब है! VAIDEHI GAYAB HAI ! पार्ट 2

साहिल को लगा कि भला इन्हें कैसे पता कि कल लड़की का एक्सीडेंट हो गया है,अभी वो सोच ही रहा था कि वो बोल उठे,”अखिल के पिता मेरे दोस्त हैं, तो उनसे ही पता लगा”  साहिल ने सिर झुकाकर हामी में सिर हिला दिया,और बोला “अंकल,प्लीज़ पापा को..” बात पूरी भी ना कर पाया था कि जैसे वो  समझ गए और बोले “मैं उन्हें कुछ नहीं बताऊँगा,चिंता मत करो” साहिल का कंधा थपथपाते हुए वो आगे बढ़ गए,और साहिल चैन की सांस लेकर, घर की ओर निकल गया****सुबह लगभग 10 बजे साहिल के मोबाइल पर फ़ोन आया,साहिल :-“हेलो“हैलो, जी मैं मीनाक्षी”साहिल:-“मीनाक्षी ..हाँ हाँ बोलो “मीनाक्षी :-“जी आपने जॉब के लिए कहा था,तो कब आ जाऊँ”साहिल:-“एक काम करो तुम शोरूम वाले एड्रेस पर आ जाओ,मैं वहीं मिलूंगा तुम्हें ठीक है”मीनाक्षी:-“जी ठीक है”साहिल:-“हम्म” बोलकर उसने फ़ोन रख दिया साहिल जल्दी से तैयार हुआ और अपने शोरूम पहुँच गया,मीनाक्षी बाहर ही खड़ी मिली,उसे देख साहिल बोला“अरे आप बाहर क्यों खड़ी हैं ,अंदर जाना था ना,मीनाक्षी -“वो मुझे लगा कि …वो “ साहिल:-“आइये मेरे साथ “कहता हुआ वो भीतर की ओर मुड़ गया,मीनाक्षी आँखे फाड़े चकाचौंध से भरे शोरूम को देख रही थी और वहाँ काम कर रहे लोगों को भी जो एक जैसी ड्रेस पहनें थे,वो उसे लेकर एक लड़की के पास आया और बोला “नीलम किसी फ्रेशर को सेल्स में एक्सपर्ट कितने दिनों में कर सकती हो तुम”नीलम सेल्स में ही थी दिखने में हँसमुख लग रही थी तपाक से बोली “वैसे तो आठ दिन में लेकिन कोई जल्दी सीखना चाहे तो शायद 4 दिनों में” साहिल :-“बहुत बढ़िया, इनसे मिलो ये मीनाक्षी है इन्हें 4 दिनों में  सेल्स में एक्सपर्ट बनाओ”नीलम :-“ठीक है सर,बना दूँगी” वो बड़े खुश होकर बोलीसाहिल :-“मीनाक्षी,नीलम की हर बात मानना ये मैडम ना जाने कितने लोगों को एक्सपर्ट बना चुकी हैं “मीनाक्षी ने मुस्कुरा कर हांमी भर दी और साहिल वहाँ से हटकर अपने केविन में आ गया, जहाँ जितेंद्र पहले से बैठा सी.सी. टी.वी. कैमरे डैस्कटॉप  में झाँक रहा  था,“अब क्या स्क्रीन के अंदर घुस जाएगा यार” साहिल के बोलने से जितेंद्र हल्का सा चौकते हुए बोला ” नहीं यार  बस्स सोच रहा था,कि देखो कितनी अच्छी लड़की है और चली थी आत्महत्या करने अगर उस दिन …”साहिल ने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोला“तूने उस दिन जो एहसान किया ,कभी भूलूँगा नहीं यार “जितेन्द्र:-“मैंने कोई एहसान नहीं किया,हाँ तूने उसे जॉब देकर बहुत अच्छा किया,वैसे मीनाक्षी अच्छी है ना “साहिल :-“हाँ ठीक ही है”जितेंद्र :-“बस्स ठीक “वो छेड़ते हुए बोलासाहिल :-“क्या यार तू भी,चल फिर मिलते हैं अभी घर जाना है” बोलते हुए साहिल बाहर आ गया,और जितेंद्र भी चला गया ****साहिल ने घर मे कदम रखा तो देखा उसके माता पिता में हल्की सी बहस हो रही थीविक्रांत सिंह:-“बच्चों जैसी बातें मत करो लता,कोई पहली बार नहीं जा रहा हूँ शहर से बाहर ” वो बैग लगाते हुए बोले प्रेमलता:-“लेकिन मेरा मन इतना कभी घबराया नहीं पहले,सुनिए मान जाइये और भी मौके आएंगे आगे “ विक्रांत सिंह :-“अच्छा बन्द करो ये पागलपन,जाहिल औरतों की तरह पेश मत आओ,बड़ी बिजनेस डील हो सकती है (फिर साहिल की ओर देखकर) साहिल अपनी माँ का ख्याल रखना ,सत्यजीत ने बहुत अच्छी डील फिक्स की है, मीटिंग के लिए जा रहा हूँ ,सब अच्छा रहा तो दो से तीन दिन लग जाएंगे लौटने में “ साहिल :-“ठीक है पापा ” साहिल ने इतना बोला और विक्रांत तेज़ क़दमों से घर से निकल गए,मशीनबत दो दिन सामान्य निकल गए..****दो दिन बाद,रात 1 बजे “साहिल…साहिल …जल्दी दरवाजा खोल”  प्रेमलता, साहिल के कमरे के दरवाजे पर अपने दोनों हाथ तेज़ी से मारते हुए बोलींसाहिल हड़बड़ा कर उठा और दरवाजा खोला“क्या हुआ मम्मी सब ठीक तो है”“कुछ ठीक नहीं हैं, तेरे पापा छत पर हैं और बड़ी तेज़ आवाज में हँस रहे हैं”“क्या ..छत पर ? कब आये वो बापस “साहिल ने आश्चर्य से पूछाप्रेमलता:-“मुझे खुद नहीं पता,मैंने कई आवाजें दी,लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया ,तू चल छत पर चल”साहिल  दौड़ता हुआ छत पर  गया और पीछे-पीछे प्रेमलता ,पूरी छत पर नजर दौड़ा दी लेकिन कोई नहीं, साहिल प्रेमलता के पास आकर उन्हें समझाते हुए बड़े प्यार से बोला “माँ मुझे लगता है आपने सपना देखा है “ “नहीं नहीं …यकीन कर मैंने उन्हें यहीं देखा था वो हँस रहे थे ,बरामदे के जाल से वो दिख रहे थे मैंने उन्हें कई आवाजें दी लेकिन सुना ही नहीं उन्होंने” साहिल:-“आप चिंता मत कीजिये मैं कल पता कराता हूँ कि वो बापस कब आ रहें हैं”प्रेमलता :-“फोन भी तो नहीं उठा रहे क्या करूँ” वो रोती हुई बोलींसाहिल उन्हें नीचे ले गया और अपने कमरे में लिटा उनकी सिर की मालिश करने लगा,ताकि उन्हें नींद आ जाये,लेकिन वो बुदबुदाती रहीं“जरूर वो किसी मुसीबत में हैं ,जरूर किसी मुसीबत में हैं”साहिल ने फ़ोन उठाकर अपने पिता को मिलाया लेकिन कनेक्ट नहीं हुआ.. ****अगले दिन ,साहिल शोरूम में सत्यजीत के सामने जाकर बोला “अंकल,आप पापा जी के साथ गए थे ना,वो बापस क्यों नहीं आये अब तक “? सत्यजीत :-“मैं कल रात ही बापस आया हूँ, उन्होंने मुझे ये बोलकर बापस भेज दिया कि किसी खास काम से वो नाहरगेंडा जा रहे हैं,जहाँ उन्हें अकेले ही जाना है” साहिल :-(असमंजस से) “नाहरगेड़ा,बड़ी अजीव बात है इस बारे में उन्होंने कुछ नही बताया,और उनका फ़ोन भी नहीं लग रहा है” सत्यजीत:-“(मुस्कुराते हुए) वहाँ नेटवर्क नहीं है,उन्होंने कहा था कि घर जाकर बता दूँ तुम्हें और मैडम को,मैं आने ही वाला था,परेशान मत होओ साहिल, आ जायेंगे वो एक दो दिन में”साहिल :-“हम्म ठीक है”                                                   थोड़ा उलझा सा आकर वो अपने केविन में बैठ गया,नजर सी सी टी वी मॉनिटर पर चली गयी ,नीलम किसी कस्टमर को नैकलेस दिखा रही थी,और मीनाक्षी पास ही बैठी उसे ध्यान से देख रही थी,शायद सेल्स समझने की कोशिश कर रही थी,साहिल ने थोड़ा बहुत काम करने की कोशिश भी की, लेकिन नहीं हो पाया, फिर भी इधर उधर के काम और कुछ दोस्तों को कॉल करता रहा फिर घड़ी देखी तो साढ़े 6 बजे का समय हो रहा था,मन नहीं लग रहा था,उठ कर बाहर आ गया, थोड़ी देर टहलता रहा फिर गाड़ी में बैठ उसे स्टार्ट कर लिया,उसी पल मीनाक्षी बाहर निकली और सड़क की

Horror Stories

वैदही गायब है! VAIDEHI GAYAB HAI !

किसी और ने नहीं उसके पिता ने जगाया है उसे मौत की नींद से. . .उसका बदला लेने के लिए नहीं .. किसी और का बदला लेने के लिए! एक रेंगलर जीप ..तेज़ स्पीड से सड़क पर दौड़ती जा रही थी ,और साहिल (उम्र-30,गेंहुआ रंग ,गहरी बादामी आँखे,तीखी पतली नाक ,थोड़े चौड़े होंठ और बालों की फिलिक्स स्टाइल,लम्बाई -6 फ़ीट,शिक्षा-एम.बी.ए.) अपने दो दोस्तों के साथ जीप की खुली छत में दोनों हाथ ऊपर किये तेज़ म्यूजिक पर झूम रहा था.. एक हाथ में सिगरेट और दूसरे में बीयर की कैन,उसके पास ही खड़ा जितेंद्र (उम्र 30,गोरा रंग,औसत नैन नख़्स,घुँघराले बाल ,लम्बाई-5 फ़ीट 11 इंच,शिक्षा-एम.बी.ए.)भी झूमता हुआ उसका साथ दे रहा था उसके हाथ मे भी बीयर कैन थी..और अखिल (उम्र -31,गेंहुआ रंग,लम्बाई -5 फ़ीट 10 इंच,शिक्षा -एम.बी.ए.,तीखी नाक औसत होंठ,औसत काली आंखे,छोटे बाल ) जीप ड्राइव कर रहा था…अचानक मस्ती में झूमता साहिल तेज़ आवाज़ में बोला” अखिल…क्या यार बैलगाड़ी जैसी स्पीड से चला रहा है..तेज़ कर ना स्पीड “ मुस्कुरा कर अखिल ने एक नजर उन दोनों को देखा, और तेज़ आवाज में कहा”साहिल …पहले ही स्पीड तेज़ है यार “ “नहीं यार …स्पीड तेज़ कर ना” इस बार जितेन्द्र बोलाऔर अखिल ने जीप की स्पीड और तेज़ कर दी..काफी देर से झूम रहे साहिल और जितेंद्र को देखकर अखिल तेज़ आवाज में बोला “बस्स..यार अब तुम दोंनो में से कोई यहाँ आकर ड्राइव करो..कुछ देर मुझे भी तो एन्जॉय करने दो “ “ओके ,मैं ड्राइव करता हूँ..”साहिल उत्साह में बोला और नीचे ड्राइविंग सीट पर आकर बैठने लगा..तो जितेन्द्र ने उसे टोक दिया …”नहीं यार तू पिये हुए है…जितेंद्र तू ड्राइव कर” “क्या यार …तू तो ऐसे बोल रहा है,जैसे मैंने शराब पी ली हो ,बीयर ही तो है …चल हट करने दे ड्राइव ” साहिल सीट पर बैठते हुए बोला …अब जितेन्द्र और अखिल खुली जीप में उत्साह से “युहुऊ “की आवाजें निकालते हुए खुश हो रहे थे और साहिल अपनी गहरी बादामी आँखे सामने के शीशे पर गढ़ाये तेज़ स्पीड में ड्राइव कर रहा था..कुछ ही मिनट बीते होंगे ..कि सामने से आ रही किसी आकृति को देखकर साहिल ने जीप की स्पीड धीमी कर दी…देखा वो सड़क के बीचों बीच ही चलती आ रही थी .. अब दिख लगने लगा था कि कोई लड़की है , “कौन है यार ये पागल.. साइड में क्यों नहीं हो रही ..”वो झल्लाता हुआ बुदबुदाया ..इतना बोल ही पाया था,कि ठीक सामने से एक कार तेज़ स्पीड से निकली,और उसकी फ्रंट लाइट्स की रोशनी से एक पल के लिए साहिल की आंखे चौंधिया गयी…एक जोरदार “धम्म” ….की आवाज के होते ही साहिल ने जोरदार ब्रेक लगाए..और अगले ही पल तीनों दोस्त जीप से नीचे खड़े थे… उनकी जीप से टक्कर खाई लड़की बेहोश पड़ी थी..मुँह के एक साइड से खून बह रहा था ,उसका..एक हाथ उसके पेट पर रखा था और दूसरा जमीन पर …खुले बाल थोड़े से उसके चेहरे पर और बाकी सड़क पर थे , तीनों के दिमाग मे एक साथ ..पुलिस, माता -पिता की डाँट और चिंता, खुद के हाथों में हथकड़ियां सब दिख गया, “मना किया था ना मैंने..कि बीयर पीकर गाड़ी मत चला…ये क्या कर दिया तूने”…अखिल गुस्से और डर से साहिल पर चिल्लाते हुए बोल“मैंने कुछ नहीं किया …ये खुद सामने से आकर टकराई है ..”साहिल गुस्से में बोला “कौन मानेगा ये …जरा बता तो …बड़ा शौक है ना .. तेज़ स्पीड में गाड़ी चलाने का …नतीजा देख .”.अखिल ने अपना हाथ सिर पर रखते हुए कहा “बोल तो तू ऐसे रहा है जैसे पहली बार बीयर पीकर गाड़ी चलाई हो..कितनी ही बार ट्रिप पर भी तेरे साथ जाने कहाँ-कहाँ नहीं गया तब तो तुझे कोई दिक्कत नहीं हुई..और आज जब ये हो गया …तो तू भी …” “बस्स, ..बस्स करो तुम लोग ,ये लड़ने का वक़्त नहीं है बल्कि ये सोचने का है, कि कैसे इस मुसीबत से बाहर निकलें” लगभग चीखते हुए जितेंद्र ने साहिल को बीच में रोकते हुए बोला और आगे बढ़कर“एक मिनट जरा देखने दो …ये जिंदा भी है ..या नहीं”जितेंद्र ने उसके हाथ की नव्ज़ देखी और बोला …”सुनों …ये लड़की जीवित है,हमें जल्दी से इसे हॉस्पिटल लेकर चलना चाहिए” “पागल हुआ है क्या…सीधे सीधे आ बैल मुझे मार वाली सलाह दे रहा है तू…पुलिस का लफ़ड़ा हो जाएगा..” साहिल ने अपने सिर के बाल नोंचते हुए कहा “मुझे लगता है..साहिल ठीक कह रहा है..हमें भाग जाना चाहिए यहाँ से” अखिल ने साहिल की बात का समर्थन किया “कैसी बात कर रहे हो तुम लोग …ये जिंदा है..छोड़ कर भागे तो ये निश्चित मर जाएगी ” जितेन्द्र आश्चर्य से बोला “तो मर जाए मेरी बला से…वैसे भी मुझे यकीन है ये …ये …सोसाइट करना चाहती थी…नहीं तो खुद आकर क्यों टकरा जाती ” साहिल ने झुंझलाते हुए बोला .. “सही कह रहा है साहिल,बहुत हुआ …चलो यहाँ से निकलते हैं ” अखिल ने चीखते हुए कहा और जीप की ओर जाने लगा..कि जितेंद्र ने उसका हाथ पकड़ लिया..और बोला “तुम लोग जी लोगे …इस अपराध बोध के साथ कि अगर वक़्त रहते बचा लिया होता ,तो एक लड़की नहीं मरती…ठीक है तुम लोग जाओ …मैं इसे ऐसे मरते हुए छोड़ कर नहीं जा सकता” साहिल ने एक गहरी साँस छोड़ी और दोनों हाथों की उँगलियाँ सिर के बालों में फंसा वो जीप तक गया और जीप का पिछला गेट खोलकर थोड़ा दूर हट कर खड़ा हो गया ….जितेंद्र ने लड़की को उठाया और गाड़ी की पिछ्ली सीट पर आहिस्ता से लिटा दिया..अब अखिल ड्राइव करने लगा..साहिल उसकी बगल वाली सीट पर बैठ गया और जितेंद्र पीछे… “जीवन हॉस्पिटल ही यहाँ सबसे पास है वहीं चले “अखिल ने पूछा .. इस पर जितेंद्र और साहिल ने एक साथ हामी भर दी… कुछ मिनट ही बीते, वो लोग हॉस्पिटल पहुँचे…डॉ ने देखा और माथे पर बल डालते हुए बोला “ये तो एक्सीडेंट का केस लगता है..पहले पुलिस को बुलाओ”ये सुना तो जितेंद्र पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे आते हुए बोला,“ये लड़की बहन है मेरी,कोई अपनी बहन का एक्सीडेंट करता है क्या? पुलिस को हम देख लेंगें.. आप पेसेन्ट को देखिए “ शायद रात की वजह से या गुस्से में तीन लडकों को एकसाथ देखकर डॉ ने आगे कुछ

Blog, Horror Stories

और ‘वो’ चुनरी संग उड़ गई !

Aur ‘Wo Chunri Sang Ud Gayi ! लकड़ी की जरूरत नहीं मधुर”….और इतना बोलते ही चंद्रा ने अपना एक पैर चूल्हे में रखा और आग जला ली..ये देख मधुर डर के मारे बदहवास सा दौड़ा पानी भरी बाल्टी उठाई और चन्द्रा के पैर पर उलट दी और गुस्से में बोला“ये क्या था चन्द्रा..ये क्या किया तुमने”“इतना प्रेम करते हो मुझसे”आंखों में प्रेम भर चन्द्रा ने मधुर को देखा फिर अपना पैर दिखाते हुए बोली“देखो कहीं लेश मात्र भी जला है क्या? तो, चलिए एक जिन्नादि और मासूम इंसान की प्रेम कहानी के सफर पर .. जुगनू दूध वाला.बदहवास सा .भूत…भूत …कहे जा रहा था,उसे देख गली के कुछ बच्चे उसके पीछे पीछे दौड़े,और कुछ महिलाएं भी साथ हो लीं ..सब एक ही बात पूछ रहे थे, “जुगनू भैया हुआ क्या ? …लेकिन जुगनू कुछ बोलने की हालत में ना था..दयाल सिंह जो .प्राइमरी के मास्टर थे, उधर से गुजर रहे थे,उन्होंने ये सब देखा तो उसी ओर  मोड़ कर अपनी साइकिल की  गति तेज कर दी,और आगे से जुगनू को पकड़ लिया ,”क्या हुआ जुगनू?“भैया …वो वो …भूत वहाँ”जुगनू की ऐसी हालत देख ,दयाल सिंह ने पास के पोखर से एक बच्चे को पानी लाने को बोला,और जुगनू को जबरदस्ती पकड़ नीचे बैठा दिया,और पानी के छीटें जुगनू के मुंह पर छिटक कर बोले“आराम से जुगनू,आराम से…ये बताओ हुआ क्या”?“भैया …मधुर के घर मे भूत है” जुगनू अपने दोनों हाथ हवा में उठाते हुए बोला“भूत.. मधुर के घर”उन्होंने चौकते हुए पूछा… “आराम से बताओ क्या देखा तुमने जुगनू ” दयाल सिंह ने जुगनू को संयत करते हुए पूछा“मैं ..रोज़ की तरह दूध देने गया था,रोज ही मुझे बर्तन बाहर रखा मिलता.. उसी में दूध पलट देता ..आज कोई बर्तन नहीं दिखा तो आवाज़ लगा दी..लेकिन जब बहुत देर तक कोई जवाब ही ना मिला.. तो किवाड़ खटखटाने  के लिए जैसे ही हाथ रखा वो अपने आप ही खुल गया..और अंदर ..अंदर मधुर भैया की पत्नी बैठी तो रसोई घर मे थी और उनके पेड़ जितने लम्बे हाथ आंगन में बने हैंडपम्प से पानी भर रहे थे”इतना कहते ही..जुगनू फिर डर से कांपने लगा, “क्या…क्या बकते हो ” ये सुन तो मास्टर जी भी डर गए“सच कह रहा हूँ भैया…रोज़ी रोटी की कसम”कसम खाते हुए जुगनू ने अपने गले की घाँटी पर हाथ रखा गांव के कई और लोग भी इस बीच आकर जुगनू की बात सुन चुके थे…“हम सबको मधुर के घर चलना चाहिए”सबने एक स्वर में कहा तो मास्टर साहब भी हामी में सिर हिलाते हुए जुगनू का हाथ पकड़  सबके साथ हो लिये….. मधुर भाई… हां मधुर को इसी नाम से जाना जाता..क्या औरतें क्या बच्चे और क्या आदमी ..पूरा कस्बा उन्हें मधुर भाई कहता.माता-पिता का देहांत तभी हो चुका था,जब वो स्नातक के विद्यार्थी थे, गुजारे के लिए आस पास के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे,और आगे की पढ़ाई पूरी की,उसी कस्बे में प्राइमरी के  अध्यापक बन गये…एक तो पढ़े लिखे होने की वजह से सबसे सम्मान मिलता  और साथ ही वो हमेशा दांत निकालकर बात करते ,छोटे मोटे सबके काम कर देते.. विनम्र होने की वजह से भी वो और सबके चहेते बन गए,..लगभग महीनाभर ही बीता होगा कस्बे से बाहर गए,जब बापस आये तो दुल्हन साथ ,सब लोग खुशी से ज्यादा आस्चर्य चकित हो गए,  ..परन्तु  सीधे साधे मधुर ने सबको दावत दे खुश कर दिया..था…. आधे से ज्यादा गांव ही मधुर के घर की ओर बढ़ा आ रहा था, इतने लोगों को अपनी ओर आता देख मधुर थोड़ा घबरा गया, “मधुर, तुम्हारी पत्नी साधारण स्त्री नहीं..कौन है वो”मास्टर साहब ने पास आते ही मधुर से पूछा“क्या मतलब भैया ?कैसी बात कर रहे हो ? मधुर डरते हुए बोला“पूरा कस्बा ही संशय ग्रस्त है..कि वो कोई भूत …या.. कोई..अ..अ… देखो ऐसा है….आदमी तो दूर किसी स्त्री ने भी तुम्हारी पत्नी को नही देखा..ऐसा क्यों भला” मास्टर जी बोले “ये क्या कह रहे हो भइया..ठीक है … तनिक रुको” ..”चंद्रा जरा बाहर आना” मधुर ने गुस्से में आवाज लगाई तो ,चंद्रा बाहर आयी… लाल जोड़े में ऐसी सजी थी जैसे कल ही विवाह हुआ हो,लचकती सी चाल और व्यक्तित्व की आभा  देख सबकी आंखे खुली की खुली रह गयीं, गोरे हाँथ लाल चूड़ियों से कोहनी तक भरे और लंबा घूंघट.. ..सबकी आंखे उसके हाथों पर टिक गयीं ..इतने खूबसूरत हाथ देख महिलाओं की तो बोलती बंद ..कोई मन ही मन अपने हाथों से उसके हाथों का मिलान कर दुखी तो कोई मारे जलन के कहे..ना जाने कुछ करती भी है कि नहीं … काम करती तो इतने सुंदर हाथ होते क्या..हम्म मधुर कुछ कोई काम करने ही नहीं देता होगा “औरतों में घुसर-फुसर शुरू हो गयी…लेकिन कोई तेज़ आवाज में मधुर की पत्नी से कुछ नहीं बोला और जब औरते ही कुछ न बोली…. तो आदमी तो कहे ही क्या …सबको चुप देखकर मास्टर जी का उत्साह भी जाता रहा..सो अपनी झेंप छुपाने के लिए मास्टर जी ने जुगनू के सिर पर चपत मारी और बोले “ले तू हाथ देख ले अपनी भौजाई के .. साले..सबेरे सबेरे ही चढ़ा के निकलता है”और फिर सब धीरे-धीरे वहाँ से घिसक गयेसबके निकलते ही मधुर ने अपनी पत्नी को टोका “आगे से होशियार रहना …दरवाजा खुला न रहे कभी…”..चंद्रा ने स्वीकृति में सिर हिलाया…और अपने काम मे लग गयीमधुर की अच्छाइयों से कस्बे के लोग ही नहीं चंद्रा भी प्रभावित होकर आयी थी … ##हुआ यूँ …कि सर्दियों के दिन थे ..फरवरी के महीना रहा होगा, मधुर पास के कस्बे से एक बच्चे को ट्यूशन पढ़ा कर बापस आ रहा था कि कुछ बदमाशों ने उनकी साइकिल छीन ली, हड़बड़ाया सा मधुर बिनती करते रहा ,पर बदमाशों ने उसे परे धकेल दिया ..और उसकी साइकल छीन कर ले गये,.मधुर साईकिल छिन जाने से बहुत दुखी हुआ और आँखो में आँसू भरे वहीं जमीन पर बैठ गया….इतने में किसी का हाथ उसने अपने कंधे पर महसूस किया मुड़कर देखा तो अति सुंदर महिला गहनों से सजी उसे ही देख मुस्कुरा रही थी…”क्या हुआ इतने परेशान क्यों  हो” उस महिला ने पूछा “उन बदमाशों ने मेरी साइकल छीन ली है” तो रोते हुए मधुर ने कहा“बस्स इतनी सी बात”..और इतना कहते ही अगले पल ही साइकल मधुर के सामने ……चौंक गया

Family Stories

विन्नी की विलेन मम्मी!

vinni ki villion mummy अपनी जिस खूबी पर आप मन ही मन खुश हो रहे होतें हैं…प्रकृति आपके उसी ग़ुण की ऐसी परीक्षा लेगी… कि आपको खुद लगेगा ..ये किस बात की सज़ा और क्यों? . सन 2016, स्थान: आगरा  समय: शाम के 6 से 7 के बीच का समय होगा, कहते हैं अपनी जिस खूबी पर आप मन ही मन खुश हो रहे होतें हैं…प्रकृति आपके उसी ग़ुण की ऐसी परीक्षा लेगी… कि आपको खुद लगेगा ..ये किस बात की सज़ा और क्यों? ..लोग कहते जरूर हैं या तो ऐसी सिचुएशन से भाग जाइये या लड़िये…मगर हालात ऐसे बनतें हैं कि लड़ना ही पड़ता है” .भागने का ऑप्शन बताना या सोचना फिजूल है….दूसरों के दुख को अपना दुख समझने की जिस आदत को मैं अच्छा मानती थी…उसके कारण इतने बड़े फसाद में फंस जाऊँगी…मैंने सपने में भी नहीं सोचा था… मैं उन दिनों पोस्ट ग्रेजुएशन के एग्जाम दे रही थी…जैसा कि जगजाहिर है उत्तर प्रदेश में लाइट आती कम है… जाती ज्यादा है, 3 दिनों बाद मेरा एग्जाम था, और गर्मी में बिना लाइट के पढ़ाई करना बहुत कोशिशों के बाद भी सम्भव नहीं हो पा रहा था। साथ ही एग्जाम का प्रेशर बेचैन कर रहा था सो अलग।“सारे बच्चे छत पर पढ़ते मिलेंगे इस समय, तुम भी छत पर क्यों नहीं पढ़ लेती..” मेरी माँ ने मुझे लाइट न होने के कारण झुंझलाते हुए देखकर कहा..छत पर पढ़ना तो बहुत दूर की बात गई  …मुझे ये भी एहसास हो जाये कि कोई मुझे पढ़ते देख रहा है तो एक मिनट भी मेरा मन पढ़ने में नहीं लगेगा, भगवान की पूजा में ध्यान और पढ़ाई मैं ऐसे कभी नहीं कर पाती..“होता क्या जा रहा है तुम्हें …बात सुन कर अनसुनी कैसे कर देती हो”…उन्होंने फिर कहा..“अरे नहीं …जा रही हूँ..बस्स मॉडल पेपर नहीं दिख रहा था…” मैं उनके गुस्से से बचने के लिए झूठ बोली, और बिना एक पल और गवाएं मैंने इकोनॉमिक्स का मॉडल पेपर उठाया और छत पर चल दी..“गुजंन को देखो…कितनी होशियार लड़की है..जब देखो पढ़ती हुई दिखेगी..कुछ सीखो उससे” मैंने छत पर जाने के लिए पहली सीढ़ी पर पैर रखा ही था, कि ये शब्द मेरे कानों में पड़े। एक छत को छोड़कर अगली छत पर सच में गुँजन आँखों के सामने छोटी सी किताब रख कर टहलते हुए पढ़ रही थी…मोहल्ले की सारी लड़कियाँ उससे चिढ़ती थीं…गुँजन की इस आदत की वजह से उनपर डाँट जो पड़ती थी…. कुछ वक्त पहले की भी बात होती तो मैं गुँजन को ऐसे पढ़ते देखकर बहुत हँसती …लेकिन उन्हीं दिनों मेरे घर पर सिन्हा आँटी और अंकल का आना अक्सर लगा रहता था..सिन्हा आँटी को कैंसर था जिसके ट्रीटमेंट के चलते उनके सिर के सारे बाल झड़ गए थे… मैंने इतने नजदीक से तब तक इस बीमारी का ऐसा भयंकर रूप नहीं देखा था…मेरे  दिमाग पर इसका बहुत असर पड़ा था, किसी की भी अजीब हरकत या आदत देखकर मेरे मन में बस यही आता ना जाने कौन …कैसे हालात से गुजर रहा हो …बेचैनी में मैंने छत पर चहलकदमी शुरू कर दी, इक्का-दुक्का बच्चे और भी पढ़ते नजर आए, “क्या यार तुम्हारे ही नखरे हैं, क्या ये बच्चे पास नहीं होते हैं ?…बहुत अच्छी ना सही..थोड़ी पढ़ाई तो होगी ही..कोशिश तो करो” ये बात मैंने खुद से ही कही और किताब खोल ली.“हा हा छत पर बैठकर पढ़ाई…वाह इतनी ही पढाकूं होती तो टॉप ना करती ..आस पास के लोग सोच रहे होंगे कितनी होशियार है लड़की”ये आवाज मेरे अंतर्मन से आयी..लोगों का अंर्तमन ज्यादातर उनके पक्ष में होता है …मेरा अन्तर्मन मेरे ही खिलाफ रहता है ..वो भी हमेशा…झुंझलाते हुए मैंने किताब बन्द कर दीमुझसे नहीं होगा…“हाइ सोना…” आवाज कानों में पड़ते ही मेरी नजर छत की ओर आती हुई सीढ़ियों पर गयी …देखा तो विनीता  चहकती हुई चली आ रही है..उसे देखकर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी …हम अपने फ्रेंड या किसी पसंदीदा इंसान को कब उस से जुड़ी चीजों से पहचानने लगतें हैं हमें खुद पता नहीं लगता..बिनीता के लंबे ईयरिंग्स और घुटनों से भी लंबे बाल मेरे लिए उसकी पहचान बन गए थे…हों भी क्यों ना..उससे पहले और उसके बाद आज तक मैंने अपने सर्कल में किसी के बाल इतने लंबे नहीं देखे…उस दिन भी ऐसा लग रहा था जैसे उसने सफेद मोतियों की माला को बीच मे से तोड़कर, दोनों कानों में पहन लिया था…‘और उस दिन बालों का जूड़ा बनाया हुआ था…औसत आँखे और गोल नाक की शेप के नीचे पतले होंठ…मेरे पास आकर उसने अपना एक हाथ मेरे हाथ में रख दिया…ये उसकी अजीब आदत थी… जब वो मुझे पहली बार मिली तो उसने अपना हाथ मेरी ओर  बढ़ाया … जाहिर तौर पर ये हाथ मिलाने का तरीका है सो मैंने भी हाथ बढ़ा दिया..लेकिन ये क्या.. उसने अपना हाथ बस्स मेरे हाथ पर रख कर छोड़ दिया था…उस वक़्त ये कुछ अजीब सा ही था मेरे लिए…खैर मैंने उसे ना तो तब ना, उसके बाद कभी टोका..मुझे पता है आजकल निश्छलता मिलना अपवाद है ..इसे टोककर क्यों कृत्रिम बनाया जाए…….मैं कुछ बोल पाती इससे पहले ही मेरी नजर उसकी माँ की ओर चली गयी …मुझे उनसे चिढ़ थी……अब तक इतनी चिढ़ जाहिर तौर पर किसी महिला से कभी नहीं हुई है…उसकी ठोस वजह भी है..कुछ सालों  पहले उनकी आँत बढ़ना शुरू हो गयी..जिसका ऑपरेशन हुआ और वो महीनों बिस्तर पर रहीं …मेरी माँ की मित्र थी सो, जब मेरी माँ उन्हें देखने गयी मुझे भी साथ लेती गयी..तब ही बिनीता से पहली बार मिलना हुआ…तब मैं हाईस्कूल में थी…बिनीता ने अपने नन्हें हाथों से पूरी ग्रहस्थी का काम संभाल लिया था…जिसमें बिनीता के माता-पिता एक छोटा भाई हर्षित और दादा, दादी भी थे।फिर बाद में उसकी माँ को आराम करने की जो लत लगी तो कभी नहीं छूटी …वो कोई ना कोई बीमारी का बहाना बना कर हर समय बिस्तर पर रहतीं और बिनीता का ध्यान पढ़ाई से हटकर घर के कामों में ऐसा रमा कि उसने हाईस्कूल के बाद पढ़ाई की ही नहीं..या पढ़ने का कारण उसकी माता जी ने छोड़ा ही कहाँ”? और उस पर भी हैरत की बात ये कि, परिवार के किसी भी इंसान को बिनीता के ना पढ़ पाने का रत्तीभर अफसोस

kya anamika bapas aayegi
Horror Stories

क्या अनामिका बापस आएगी!

                                          1. “दरवाजा खोल.. अंकित “ “मैं कहता हूँ ..खोल दरवाजा” बहुत देर से दरवाजे पर दस्तक दे रहे थे घनश्याम लेकिन अंकित दरवाजा नहीं खोल रहा था। घनश्याम मकानमालिक थे और अंकित उनके यहां किरायेदार है और 6 महीने से किराया नही दे पाया था इसीलिए आज घनश्याम बहुत नाराज थे और उनकी ये नाराजगी समझ कर ही अंकित डर की वजह से गेट नहीं खोल रहा था. “ठीक है मत खोल ..मैं भी देखता हूँ कब तक गेट नही खोलता तू यही बैठा रहूँगा दरवाजे के बाहर ” घनश्याम बरामदे में पड़े एक स्टूल पर बैठ गए. “अरे ..कभी मेरी भी तो सुना  करो ..इतनी गुस्सा अच्छी नहीं.. हालात तो समझो उसकी..अच्छा मैँ ही ऊपर आती हूँ” घनश्याम की पत्नी अंकित से खास स्नेह रखती थीं खुद का कोई बच्चा ना होने के कारण उसे खुद के बेटे जैसा मानती थीं “खबरदार, जो ऊपर आयीं ..अभी -अभी तो तुम्हारा पैर ठीक ही हुआ है..वही नीचे रहो..तुम्हारी शह से ही, इसके कान पर जूं नहीं रेंगती मेरे  कुछ भी कहने की” घनश्याम ने डांटते हुए रोक दिया सरोज को,शरीर से गोल मटोल सरोज ने अपना पैर सीढ़ी पर रखा ही था कि पीछे हटा लिया, हाल ही में पैर में फ्रेक्चर होने की वजह से उन्हें दो महीने बेड रेस्ट  पर रहना पड़ा और अभी चलना फिरना शुरू ही किया था “ठीक है नहीं आती ,पर तुम तो आओ नीचे” सरोज ने मनुहार करते हुए कहा “तुमने सुना नहीं शायद ..जब तक ये दरवाजा नहीं खोलेगा ..मुझे मेरे किराये के पैसे नहीं देगा ..नहीं आऊंगा” खीजते हुए घनश्याम को देख सरोज फुसफुसा कर बोलीं “शर्म नहीं आती तुम्हें,एक तो उसकी माँ नहीं रहीं और ऊपर से नौकरी चली गयी..और तुम हो…कि पैसे चाहिए” “पता है भागवान …लेकिन उनको गए पाँच महीने बीत गए हैं..तुम्हे तो कोई भी पागल बना दे..जरा प्यार से  ये लड़का बात क्या कर लेता है तुमसे, तुम तो बेकार में ही भावुक हुई  जाती हो ..ये नहीं समझ आता कि ये बेबकूफ़ समझता है तुम्हें” झुंझलाए से घनश्याम गले मे पड़े गमछे  से पसीना पोछते हुए बोले… “हे राम बड़ी गर्मी है यहाँ”.. आज की रात और रह ले..कल तुझे  बाहर न  निकाला तो कहना”  बोलते हुए घनश्याम जीने से नीचे उतर आए.पचपन छप्पन साल उम्र रही होगी .घनश्याम की..एक छोटी सी कपड़े की दुकान थी उनकी और स्वभाव से चिड़चिड़े और गुस्सैल थे वही उनकी पत्नी सरोज गेंहुए रंग की गोल मटोल सी शांत और भावुक महिला थीं.. अगले ही दिन घनश्याम एक तगड़े से आदमी को साथ ले आये जिसे देखकर सरोज ने प्रश्नवाचक निगाहों से घनश्याम की ओर देखा लेकिन  घनश्याम ने अनदेखा कर दिया…और सीधे सीढ़ियों से ऊपर चले गए . “देख ये रहा कमरा… तोड़ इसे और जो भी सामान है निकाल कर फेंक  दे” उसी तगड़े से आदमी को आर्डर सुना वो वहीं स्टूल पर बैठ गए…सरोज भी सीढिया चढ़ आ गयीं थीं.. “सुनो जी..ये ठीक नहीं ..वो अभी है भी नहीं और किसी के घर को उसकी अनुपस्थिति में खोलना.नहीँ  ठीक नहीं” सरोज हर सम्भव कोशिश कर रही थीं लेकिन घनश्याम अपनी जिद पर थे “किसी का घर नहीं है ये सिवाय मेरे ..समझीं तुम..और तुम आयीं क्यों ऊपर ?..पूरे पांच हज़ार रुपये खर्च हुए हैं तुम्हारे पैर पर अब तक , लेकिन तुम्हे कोई फर्क नहीं”  इतने में ही दरवाजा टूट गया..और अंकित का सामान फेंका जाने  लगा अंकित ने सड़क से आते हुए जब ये देखा तो दौड़ता हुआ आया लेकिन सब नज़ारा देख ठिठक कर रह गया…कुछ नही बोला सामान के नाम पर कुछ खास था भी नहीं.. कुछ बर्तन ,एक छोटा सा सिलेण्डर,कुछ डिब्बे ..अंकित अपने कमरे में गया और बचे हुए कपड़े समेट एक चादर में बाँध कर पोटली बना ली और सरोज के पैर छूने झुका तो बिना बोले ही उन्होंने अपनी विवशता जताई..लाल बड़ी सी बिंदी के थोड़ा नीचे दोनों तरफ छोटी सी दो आंखों में उसने अपने लिए ममता देखी  “आप ने हमेशा मेरी माँ ना होते हुए भी मेरी माँ का फ़र्ज़ निभाया..लेकिन मैं आपके लिए कुछ ना कर सका..आपसे मिलने आता रहूँगा और फ़ोन भी करूँगा” और ये बोल अंकित तेज़ कदमों से बाहर निकल गया ,सरोज ने घनश्याम की तरफ देख कर कहा “आज के बाद मुझसे बात मत करना ..हमेशा पैसा पैसा करते रहते हो ..हुम्”  और नीचे उतर गयीं.. . ….घर के पास ही सारा सामान सड़क के किनारे रख अंकित ये सोच अफसोस में था कि अगर थोड़ी मनुहार कर ली होती तो घर के अंदर होता इस वक़्त ,ज्यादा पढ़ा लिखा इंसान कोई छोटा काम भी नहीं कर सकता और उसे झुकना भी नहीं आता.. क्या जरूरत थी इतना पढ़ने की पोस्ट ग्रेजुएट हिस्ट्री में…अपने समय का कॉलेज टॉपर और हालात ये कि दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं..यू तो एक प्राइवेट इंटर कॉलेज में जॉब चल रही थी उसकी.कि माँ का देहांत हो गया…घर गया तो पूरे महीने गम और अवसाद से बाहर  ही ना आ पाया..और जब बापस हिमाचल आया तो, बिना सूचना इतनी लंबी छुट्टी के कारण उसे जॉब से बाहर निकाल दिया गया.और अब यहाँ बोर्ड के एग्जाम के बाद कॉलेज बन्द हैं… “प्लीज बात कीजिये ना..आप..मुझे लाना है.. गोल्ड मेडल हिस्ट्री में “ ये आवाज उसके कानों में पड़ी तो नजर उधर ही घूम गयी ..जरा सी दूरी पर एक लड़की फ़ोन पर बात कर रही थी ..हिस्ट्री का नाम सुना तो उसके ठीक सामने चला गया..थोड़ी सी हील वाली सेंडिल और नीलेंथ स्कर्ट के साथ वाइट टॉप ..कमर से थोड़े ऊपर तक खुले बाल  और मोबाइल हाथ मे लिए वो किसी से मनुहार कर रही थी…यूँ खुद की ओर एक लड़के को घूरते देखा तो हाथ के इशारे से पूछा “क्या है “ और अंकित “ना” में सिर हिलाते हुए बापस हो लिया.. “एक्सक्यूज़ मी..यस यू ..मिस्टर ..व्हाट्स रॉंग विद यू”? “अ ..अ ..नथिंग” अंकित ने अपनी झेंप छुपाते हुए कहा “वरन्ट यू स्टेरिंग एट मी”? “आइ एम सॉरी..इट सीमड लाइक दैट, बट.. एक्चुअली “हिस्ट्री बर्ड “ड्रेगड मी देयर इन फ्रंट ऑफ यू” “सो आर यू टू ,लुकिंग फ़ॉर टीचर”? “नो आई एम ..अ .अ टीचर इटसेल्फ” “सो?” कोई प्रतिउत्तर नही मिला उसे अंकित से, तो उसने बोलना जारी रखा.. “तो

Scroll to Top