वैदही गायब है! VAIDEHI GAYAB HAI- पार्ट 6
“हम्म…वो तुम पर चौतरफा हमला करने वाली है,पारिवारिक रूप से कर ही रही है,जल्दी ही आर्थिक और भावात्मक चोट भी करने वाली है..साहिल ..तुम्हारी लड़ाई सामान्य दुश्मन से नहीं बल्कि एक बुरी आत्मा से है..खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लो” प्रेमलता को रोता देख साहिल जैसे ही उनकी ओर बढ़ता है, गुरुजी उसे दूर ही बने रहने का इशारा करते हैं और खुद आगे बढ़ कर पूछते हैं “बोलो माई..फिर क्या हुआ” प्रेमलता :-“फिर हमें दो दिन बाद ही पता लगा कि वैदही ने खुद को आग लगा कर आत्महत्या कर ली थी… साहिल :-“(चौंकते हुआ) “क्या …”प्रेमलता :-(हामी में सिर हिलाती हुई)”हम्म…मेरे पति और मैंने ये बात साहिल को ना बताने का निर्णय लिया ..हम डर गए थे,कि कहीं साहिल खुद को किसी भी प्रकार से दोषी मानकर सामान्य जिंदगी ना जी पाए …गुरु जी :- “हम्म प्रेमलता:-“जब ये खबर सत्यजीत भाई साहब ने हमें बताई ,तब हमने उनसे यही अनुरोध किया कि वो ये बात साहिल को ना बातये,और वो मान भी गए..और पहले की ही तरह मेरे पति के बिज़नेस में उनका साथ देते रहे आज भी साथ काम कर रहें हैं ..बड़े भले आदमी हैं” गुरुजी:-(शून्य में ताकते हुए बहुत धीरे से) “भला दिखना और भला होना… दोंनो में बड़ा फर्क है…(फिर सामान्य आवाज में) साहिल क्या घर में लहसुन है? जल्दी लाओ?” साहिल ने प्रेमलता की ओर देखा,इस आशय से कि क्या लहसुन है? तो उन्होंने हामी में सिर हिला दिया,साहिल अंदर गया और लहसुन ले आया…गुरुजी के बूढ़े हाथ तेज़ी से चलने लगे और सब चुपचाप उन्हें देखनें लगे..थोड़ी देर बाद ही उन्होंने लहसुन की कलियों से बनी एक माला साहिल के गले में पहना दी और दूसरी प्रेमलता को देते हुए बोले,”इसे पहन लो माई”साथ ही दो काले धागे की मालायें उन्होंने अपनी झोली में से निकाल कर क्रमशः जितेंद्र और अखिल को दे दी,और बोले:- “वैदही … उसे जगाया गया है बदला लेने के लिए” साहिल :-(चौंकते हुए) “बदला ..किससे” गुरु जी:-“तुमसे ..” साहिल :-“(हैरत से) मुझसे”? गुरुजी :-“हम्म…वो तुम पर चौतरफा हमला करने वाली है,पारिवारिक रूप से कर ही रही है,जल्दी ही आर्थिक और भावात्मक चोट भी करने वाली है..साहिल ..तुम्हारी लड़ाई सामान्य दुश्मन से नहीं बल्कि एक बुरी आत्मा से है..खुद को मानसिक रूप से तैयार कर लो” साहिल:-(अवाक सा) आखिर किस बात का बदला..मैंने ऐसा क्या किया है”? गुरुजी:-“तुम दोषमुक्त हो बेटा, लेकिन वो तुम्हें विवाह से मना करने के कारण दोषी मानती है” साहिल :-(रोते हुए)”ओह्ह आत्मा बनकर और मेरे पापा.. वो ठीक तो हैं गुरुजी “? गुरुजी:-“यूँ रोना बिलखना बन्द करो,ये लड़ाई तुम्हारी है.. लड़नी ही होगी,अन्य कोई उपाय नहीं,अपने पिता के बारें में भी जल्द ही जान लोगे…(आसमान की ओर देखकर) आज की रात बहुत भयानक है..विधिवत पूजा करनी होगी,हमें जाना होगा” “आप हमें अकेला छोड़कर नहीं जा सकते गुरुजी”सब एक साथ घबराते हुए बोले “हमें रातभर यज्ञ करना होगा..जब तक ये अभिमंत्रित मालायें तुम लोगों के गले में हैं,वो किसी को मार नहीं पाएगी,याद रहे किसी भी हालत में गले से ये मालायें ना निकलने पायें …बस्स” ये बोल कर गुरुजी वहाँ से चले गए.साहिल ने गोविंद को भी उसके घर भेज दिया,और प्रेमलता को बिस्तर पर लिटाकर सब उनके आस-पास बैठ गए… थोड़ी देर बाद, अंकित उठा और सड़क पर चलने लगा,कि उसने सुना कोई धीरे धीरे उसका नाम ले रहा है ..वो पीछे पलटा देखा तो मीनाक्षी थी,मुस्कुराती हुई उसकी ओर देख रही थी वो खुश होकर उसके पास गया और बोला ” तुम्हें कुछ बताना चाहता हूँ” “हम्म बोलो ना”वो अपना हाथ उसकी ओर बढ़ाते हुए बोली “यही ..कि मैं तुम्हें बहुत पसंद करने लगा हूँ” बोलते हुए उसने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया,एक शर्द वर्फ सी सरसरी जैसे साहिल की नसों में दौड़ गयी हो,उसने घबराकर अपना हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन पकड़ इतनी मजबूत थी कि हाथ हिलाना तक मुश्किल हो गया,उसने मीनाक्षी की ओर देखा. आधा जला हुआ चेहरा जो बहुत भयानक दिख रहा था,और बाकी का आधा चेहरा बालों से ढंका हुआ ‘आ..ह’ डर से उसके मुँह से चीख निकल गयी.. “क्या हुआ साहिल” जितेंद्र ने उसे हिलाते हुए पूछा,साहिल ने डर से सहमें जितेंद्र को देखा,और आस पास नजर दौड़ाई फिर धीरे से सहम कर बोला”ओह्ह…इतना भयानक सपना” ‘घर्रर ‘की आवाज के साथ साहिल का फोन पर ‘मीनाक्षी की माँ”‘ लिखा हुआ फ्लैश हुआ,उसने फ़ोन उठाया,उधर से मीनाक्षी की माँ रोते हुए बोलीं “साहिल,मेरी बेटी कहाँ है”? साहिल-(चौंकते हुए)”क्या मीनाक्षी घर नहीं पहुँची अब तक “?“नहीं..मेरी मदद करो बेटा,जल्दी आ जाओ मुझे बड़ी घबराहट हो रही है” और साहिल का जवाब सुने बिना ही उन्होंने फोन रख दिया ..अवाक से साहिल को देखकर अखिल ने आशंकित होते हुए पूछा “क्या हुआ”? “मीनाक्षी अब तक घर नहीं पहुंची है,आँटी का फोन था,मुझे जाना होगा” उसने उठते हुए कहा और तेज़ी से ये बोलते हुए निकल गया कि “मम्मी का ख्याल रखना” मीनाक्षी के घर जाकर साहिल ने दरवाजे पर दस्तक दी,दरवाजा खुला तो वो चौंक गया…”मीनाक्षी ” उसके मुँह से निकल गया और वो हतप्रथ सा उसे देखते हुए बोला “तुम …कब आयी “? “ऐसे क्यों पूछ रहे हो ..मैं तो हॉस्पिटल से सीधे घर ही आयी थी”साहिल:-“(चौकते हुए) क्या ..लेकिन तुम्हारी ..?” मीना…क्षी..”बीच में ही मीनाक्षी की माँ उसे पुकारते हुए वहाँ आयी,और बोली “जल्दी से मेरे साहिल के लिए कुछ खाने को ला “अपनी माँ के ऐसे बोलने से मीनाक्षी को थोड़ा अजीब लगा और वो कंधे उचकाते हुए किचिन की ओर चली गयी, “माँ ssss….”एक तेज़ चीख किचिन की ओर से आई तो साहिल उसी ओर भागा, किचन में जो देखा उसे देखकर वो डर गया ,मीनाक्षी की माँ फर्श पर मृत पड़ी थी…वो तेज़ी से पलटा और बाहर कमरे की ओर भागा,वहाँ अब कोई नहीं था… वो खुद से बोला “वै..द..ही” फिर किचन में जाकर उसने मीनाक्षी का हाथ पकड़ा और बोला “जल्दी चलो यहाँ से मीनाक्षी” “(रोते हुए) मेरी माँ नहीं रही साहिल…” “…जल्दी चलो मीनाक्षी …प्लीज़ चलो “वो उसका हाथ खींचते हुए घबराकर बोला “मैं कहीं नहीं जाऊँगी..अपनी माँ को छोड़कर”उसने रोते हुए जवाब दिया कुछ ना समंझ पाने की स्थिति में वो बापस कमरे में आ गया, कि उसे लगा किसी ने पीछे की ओर